ब्राजील का वेनेजुएला बनने से बचा लूला का किला: आखिरी वक्त में पलटी बाजी, ट्रंप की रणनीति धरी की धरी
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ब्राजील में 2026 के राष्ट्रपति चुनाव ने इतिहास रच दिया है। 80 वर्षीय लूला दा सिल्वा ने एक ऐसी वापसी की है जिसे राजनीतिक विश्लेषक चमत्कार मान रहे हैं। चुनावी दौड़ में पिछड़ने के बाद भी लूला ने अंतिम समय में बाजी पलटते हुए दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो को करारी शिकस्त दी।

पहले दौर में बिखरे, दूसरे में बिखेरा जादू चुनाव के पहले दौर में लूला दा सिल्वा लगभग 22 लाख वोटों से पीछे चल रहे थे, जिससे उनकी हार की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, दूसरे दौर में लूला ने 51.79% वोट हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बना दिया। ब्राजील के लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहली बार है कि पहले दौर में पिछड़ने वाला उम्मीदवार अंतिम मुकाबले में विजेता बनकर उभरा।

व्हाइट हाउस के लिए बड़ा झटका इस जीत का असर वाशिंगटन तक महसूस किया गया है। फ्लावियो बोल्सोनारो, जो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के पुत्र हैं, को डोनाल्ड ट्रंप के खेमे का करीबी माना जाता है। लूला और ट्रंप के बीच लंबे समय से व्यापारिक और वैचारिक तनाव रहा है। लूला की जीत को ट्रंप की क्षेत्रीय रणनीति के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि लूला हार जाते, तो ब्राजील की स्थिति वेनेजुएला जैसी अस्थिरता की ओर बढ़ सकती थी।

भगवान की कृपा और जनता का भरोसा अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद लूला काफी भावुक नजर आए। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय सीधे तौर पर ईश्वर और जनता को दिया। उन्होंने कहा, मुझसे अधिक पढ़े-लिखे और योग्य लोग दुनिया में हैं, फिर भी जनता ने मुझे चुना। मुझे लगता है कि भगवान हमेशा मुझ पर मेहरबान रहे हैं और मेरे सिर पर उनका हाथ है।

चुनौतियों से भरा है भविष्य चुनाव जीतना लूला के संघर्ष का पहला पड़ाव मात्र है। उनके सामने अब एक ऐसी संसद है जहाँ दक्षिणपंथी दलों का दबदबा है। महंगाई, बढ़ता सरकारी कर्ज और अपराध जैसी समस्याएं उनके लिए कड़ी परीक्षा साबित होंगी। लूला ने वादा किया है कि वह शासन के तरीके को बदलेंगे, जनता की भागीदारी बढ़ाएंगे और अमेरिका-चीन पर निर्भरता कम करने के लिए नई नीतियां लागू करेंगे।

निष्कर्ष लुला की यह जीत केवल राजनीति नहीं, बल्कि एक लंबे संघर्ष की परिणति है। ट्रंप के साथ बढ़ते तनाव और घरेलू दबाव के बीच, लूला का यह कमबैक ब्राजील की विदेश और घरेलू नीति की दिशा तय करने वाला साबित होगा। लेकिन, क्या लूला अपनी इस जीत को शासन की सफलता में बदल पाएंगे? यह देखना अभी बाकी है।

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