बेसहारा जानवरों का सहारा बना शेल्टर जमींदोज: रिश्वत के आरोपों और MCD की कार्रवाई पर मचा बवाल
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दिल्ली में बेसहारा और बीमार जानवरों के लिए उम्मीद की एक किरण बन रहे पशु आश्रय (एनिमल शेल्टर) को ढहाए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। पशु अधिकार कार्यकर्ता जागृति मिश्रा द्वारा बनाया जा रहा यह शेल्टर अब विवादों के केंद्र में है, जहां विकास और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

70 लाख की लागत, दो साल की मेहनत पर चला बुलडोजर जागृति मिश्रा लंबे समय से सड़कों पर लावारिस, घायल और पैरालाइज्ड जानवरों की सेवा कर रही हैं। इसी मिशन को विस्तार देने के लिए उन्होंने अपनी बचत और लोगों से मिले दान के जरिए एक आधुनिक पशु आश्रय और गौशाला का निर्माण शुरू किया था। उनका दावा है कि इस परियोजना पर अब तक करीब 70 लाख रुपये खर्च हो चुके थे, लेकिन बिना किसी पूर्व नोटिस के MCD की कार्रवाई ने उनकी दो साल की मेहनत को मलबे में तब्दील कर दिया।

रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप इस घटना ने तब और तूल पकड़ा जब जागृति ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के बदले उनसे रिश्वत की मांग की गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में स्थानीय व्यक्ति सोनू डबास और MCD के जूनियर इंजीनियर विकास गुप्ता का नाम सामने आया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इसने प्रशासनिक भ्रष्टाचार के दावों को हवा दे दी है।

AAP नेताओं का आभार और स्पष्टीकरण शुरुआती विवाद के दौरान राजनीतिक संबंधों को लेकर काफी भ्रम की स्थिति बनी थी। हालांकि, बाद में जागृति मिश्रा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई गठबंधन नहीं है। उन्होंने इस कठिन समय में मदद का हाथ बढ़ाने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं का आभार भी जताया है। इस स्पष्टीकरण के बाद अब पूरा ध्यान कार्रवाई के कानूनी पहलुओं पर केंद्रित हो गया है।

MCD की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल घटना के बाद से ही MCD की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई पर कई सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या कार्रवाई से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था? क्या नगर निगम ने ध्वस्तीकरण से पहले कोई नोटिस जारी किया था? साथ ही, जमीन की वैधता और तोड़फोड़ के पीछे के असल कारणों की जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है।

अब आगे क्या होगा? इस पूरे प्रकरण का सबसे दुखद पहलू उन बेसहारा और दिव्यांग जानवरों का भविष्य है, जिनके लिए यह शेल्टर अंतिम उम्मीद था। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा और क्या इस पशु कल्याण परियोजना को फिर से खड़ा करने का कोई रास्ता निकलेगा। फिलहाल, इस मामले में जवाबदेही तय होना ही न्याय की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।

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