जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला अपने एक नए बयान को लेकर विवादों के घेरे में हैं। बारामूला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार और पाकिस्तान को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।
पाकिस्तान हमें बचा रहा है फारुख अब्दुल्ला ने दिल्ली पर सीधा हमला करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के इरादे कश्मीर को लेकर नेक नहीं हैं। उन्होंने बिना नाम लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान का बचाव करते हुए कहा, आज दिल्ली इसलिए शांत है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव है। हमारा पड़ोसी (पाकिस्तान) उनके पीछे पड़ा है और हर जगह यह आवाज उठा रहा है कि कश्मीर का मुद्दा अभी हल नहीं हुआ है। पाकिस्तान हमें बचा रहा है।
भाजपा का पलटवार: यह देशद्रोह है अब्दुल्ला के इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता रविंद्र रैना ने इसे राष्ट्रद्रोह करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान कश्मीर का कातिल है। उन्होंने कहा, पिछले 35 वर्षों से पाकिस्तान कश्मीर को कब्रिस्तान बनाने पर तुला है। हमारे असली रक्षक हमारे जवान हैं, पाकिस्तान नहीं।
विकास और धारा 370 का तर्काधार भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने अब्दुल्ला के दावे को खारिज करते हुए कहा कि कश्मीर का हाल अब पहले से कहीं बेहतर है। उन्होंने कहा, धारा 370 हटने के बाद कश्मीर का पूरी तरह भारत में विलय हुआ है। आज हर साल दो करोड़ पर्यटक यहां आ रहे हैं और कश्मीर आर्थिक रूप से प्रगति कर रहा है।
मुस्लिम एकता की अपील अपने संबोधन के दौरान फारुख अब्दुल्ला ने देश के मुसलमानों से भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों के घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि मुसलमान ऐसी सरकार का समर्थन कैसे कर सकते हैं जो उनकी पहचान मिटाने पर आमादा हो।
राजनीतिक गरमाहट का दौर भाजपा ने अब्दुल्ला के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि सरकार की अतिक्रमण विरोधी मुहिम में किसी धर्म को निशाना नहीं बनाया जाता, बल्कि कानून का पालन किया जाता है। बहरहाल, फारुख अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है जब घाटी की राजनीतिक स्थिति पर देश भर की नजरें टिकी हैं। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच शब्दों की यह जंग फिलहाल थमती नहीं दिख रही है।
*#WATCH | Baramulla, Jammu and Kashmir: National Conference Chief Farooq Abdullah says, Doctors who come from outside Jammu and Kashmir to pursue MBBS, MD, or MS courses, as well as students who study medicine here, are required to serve for two years in villages, hospitals, and… pic.twitter.com/ixQTMEqbCe
— ANI (@ANI) October 24, 2026
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