मुंबई की हवा में जहर: आखिर समुद्र किनारे बसा शहर क्यों हो रहा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित?
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मुंबई में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक होता जा रहा है। 15 अक्टूबर 2026 को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 152 दर्ज किया गया, जिससे मुंबई प्रदूषण के मामले में दिल्ली से भी आगे निकल गई। यह इस साल दूसरी बार है जब आर्थिक राजधानी की स्थिति इतनी बिगड़ी है।

बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, मांगा जवाब

मुंबई की बदतर होती हवा पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने प्रशासन से सवाल किया है कि आखिर समुद्र तटीय शहर होने के बावजूद मुंबई की हवा दिल्ली से भी खराब कैसे हो गई? कोर्ट ने स्थिति को आपातकालीन बताते हुए अधिकारियों को 26 अक्टूबर की सुनवाई में प्रदूषण नियंत्रण के ठोस उपायों का विवरण पेश करने का निर्देश दिया है।

हवा की सुस्त रफ्तार बनी विलेन

विशेषज्ञों के मुताबिक, मुंबई की भौगोलिक स्थिति आमतौर पर प्रदूषण को साफ करने में मदद करती है, क्योंकि समुद्र की हवाएं प्रदूषकों को बहा ले जाती हैं। लेकिन, जब हवा की गति कम हो जाती है, तो वाहन के धुएं और निर्माण कार्यों की धूल शहर में ही ठहर जाती है, जिससे हवा जहरीली हो जाती है।

मौसम का बदलता मिजाज और उमस

इस साल मुंबई में मानसून की बारिश कम रही है और असामान्य उमस बनी हुई है। मौसम में आए इस बदलाव ने प्रदूषण को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव के कारण सर्दियों में तापमान में होने वाले बदलाव भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस साल जनवरी-फरवरी में AQI 400 के स्तर पर पहुंच गया था, जो गंभीर चिंता का विषय है।

कचरा प्रबंधन की विफलता

शहर के बाहरी इलाकों, जैसे भिवंडी और अलीबाग में खुले में कचरा जलाना प्रदूषण की बड़ी वजह है। कुछ जगहों पर PM2.5 का स्तर 1,000 के पार दर्ज किया गया है। PM2.5 हवा के सूक्ष्म कण होते हैं जो फेफड़ों में सीधे प्रवेश कर जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में निगरानी केंद्रों की कमी के कारण वास्तविक प्रदूषण का पता लगाना भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

बाहरी राज्यों के प्रदूषक भी शामिल

मुंबई का प्रदूषण केवल स्थानीय नहीं है। अक्टूबर-नवंबर में हवा की दिशा के कारण मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों से आने वाले प्रदूषक भी मुंबई की फिजा बिगाड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर को साफ रखने के लिए केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति बनानी होगी।

आने वाली 26 अक्टूबर की हाईकोर्ट सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं कि प्रशासन बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कार्ययोजना पेश करता है।

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