सोने की दुनिया में एक नए वैज्ञानिक दावे ने हलचल मचा दी है। अमेरिका की स्टार्टअप कंपनी मैराथन फ्यूजन ने दावा किया है कि उसने पारे (Mercury) को असली और स्थिर सोने में बदलने की तकनीक विकसित कर ली है। इस दावे ने न केवल निवेशकों, बल्कि वैज्ञानिकों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है।
इस प्रक्रिया को न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन (परमाणु नाभिक में बदलाव) कहा जाता है। कंपनी का कहना है कि फ्यूजन रिएक्शन से पैदा होने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रॉन का उपयोग करके मर्करी-198 को मर्करी-197 में बदला जा सकता है। इसके बाद, यह रेडियोधर्मी क्षय के जरिए स्थिर गोल्ड-197 में तब्दील हो जाता है।
हालांकि, यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है। इसमें रेडियोएक्टिव कचरा बनने का बड़ा खतरा रहता है, जिसे सुरक्षित रूप से अलग करना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।
प्रयोगशाला में सोना बनाने की कोशिशें नई नहीं हैं। इससे पहले यूरोप की मशहूर लैब CERN में वैज्ञानिकों ने सीसे (Lead) के परमाणुओं को टकराकर सोने के नाभिक बनाए थे। हालांकि, वह मात्रा इतनी कम (करीब 29 पिकोग्राम) थी कि उसे आंखों से देखना भी असंभव था और वे नाभिक कुछ ही पलों में टूट गए थे। मैराथन फ्यूजन का दावा है कि वह इस रिकॉर्ड को 10 गुना पीछे छोड़ चुकी है।
फिलहाल, इस दावे के पीछे ठोस डेटा का अभाव है। कंपनी ने अब तक यह साझा नहीं किया है कि उसने कितना सोना बनाया है और इसकी उत्पादन लागत क्या है।
तुलना करें तो, दुनिया भर की खदानों से हर साल करीब 3,600 टन सोना निकलता है। कंपनी के अनुमान के मुताबिक, एक व्यावसायिक प्लांट सालाना सिर्फ 2 टन सोना बनाने की क्षमता रख सकता है। खनन से मिलने वाले सोने के मुकाबले यह मात्रा फिलहाल बेहद मामूली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लैब में बने सोने का असर लैब में बने हीरों (Lab-grown diamonds) जैसा हो सकता है। लेकिन हीरों और सोने के बाजार में बड़ा अंतर है। सोने के निर्माण में आ रही भारी लागत और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण इसकी कीमतें गिरने की संभावना अभी बहुत कम है।
बाजार की वर्तमान स्थितियों पर गौर करें तो, सोना पहले ही जनवरी 2026 के अपने उच्च स्तर से करीब 5.56% नीचे कारोबार कर रहा है। सोने के बाजार में आई यह गिरावट किसी वैज्ञानिक प्रयोग के बजाय बाजार की सामान्य चाल का परिणाम है।
मैराथन फ्यूजन का दावा विज्ञान के नजरिए से रोमांचक जरूर है, लेकिन यह अभी आम लोगों या निवेशकों के लिए चिंता का विषय नहीं है। जब तक यह तकनीक कम लागत में सुरक्षित और बड़े पैमाने पर सोना बनाने में सक्षम नहीं होती, तब तक असली सोने की चमक और उसकी वैश्विक मांग पर इसका कोई बड़ा असर पड़ने के आसार नहीं हैं।
Last month, we demonstrated high-rate alchemy: turning mercury into real, stable gold, beating CERN’s record by a factor of 10.
— Marathon Fusion (@MarathonFusion) October 21, 2026
Last week, we enriched isotopes in the world’s most powerful plasma centrifuge, beating the Soviet record that stood for 40 years.
Now, we’re building… pic.twitter.com/GFlLidBdh8
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