मैक्रों सरकार के खिलाफ फ्रांस की सड़कों पर उबाल: हजारों गिरफ्तार, कई शहरों में हिंसक झड़पें
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फ्रांस इस समय एक बड़े आंतरिक संकट से जूझ रहा है। शिक्षा व्यवस्था और सरकार की सख्त नीतियों के खिलाफ देश भर में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। पेरिस से लेकर मार्सेई तक, विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है, जिससे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

पेरिस में 1.10 लाख से अधिक प्रदर्शनकारी राजधानी पेरिस में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 1.10 लाख लोगों ने सड़कों पर मार्च निकाला। हालांकि अधिकांश हिस्सों में शांति बनी रही, लेकिन लियोन, मार्सेई और स्ट्रासबर्ग जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं। बोर्डो में प्रदर्शनकारियों ने दुकानों के तख्तों को उखाड़कर बैरिकेड्स बना लिए।

70 हजार पुलिसकर्मी तैनात, वाटर कैनन का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए फ्रांस सरकार ने देशभर में 70,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। कई शहरों में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जबकि नैंसी में हालात काबू करने के लिए वाटर कैनन का सहारा लिया गया। सरकार ने सुरक्षा के लिए हेलीकॉप्टर और बख्तरबंद वाहनों को भी स्टैंडबाय पर रखा है।

सांस्कृतिक स्थलों पर ताले, अर्थव्यवस्था को भारी चोट विरोध प्रदर्शनों की आंच पर्यटन पर भी पड़ी है। सुरक्षा कारणों से पेरिस के लूव्र, ओरसे संग्रहालय, पिकासो संग्रहालय और ग्रैंड पैलेस जैसे ऐतिहासिक स्थलों को बंद कर दिया गया है। मशहूर आर्ट बेसल मेला भी रद्द कर दिया गया है। पिछले सप्ताह की हिंसा में करीब 3,000 दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई, जिससे व्यापारियों में भारी रोष है।

2,700 लोग हिरासत में, जनता का फूटा गुस्सा अधिकारियों के अनुसार, देशभर में अब तक 2,700 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज दबा रही है। पेरिस में प्रदर्शन कर रही 26 वर्षीय जेली का कहना है, मैक्रों सरकार हम पर भारी टैक्स लगा रही है, हमारी कमाई छीनी जा रही है और हमें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा। जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जातीं, यह संघर्ष जारी रहेगा।

यूरोप में सुलगता असंतोष फ्रांस की स्थिति केवल एक देश तक सीमित नहीं है। इटली, स्पेन, पुर्तगाल और अल्बानिया में भी महंगाई और शिक्षा नीतियों को लेकर जनता सड़कों पर है। यूरोप में जारी यह व्यापक विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, और राष्ट्रपति मैक्रों की नीतियों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।

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