नई दिल्ली: भारत का कृषि क्षेत्र अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) में स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य केवल उत्पादन बढ़ाने में नहीं, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) में छिपा है।
मात्रा से आगे बढ़ने का समय चिराग पासवान ने कहा कि आजादी के बाद भारत की प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा और उत्पादन क्षमता बढ़ाना थी, जिसमें हरित क्रांति ने अहम भूमिका निभाई। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक है। लेकिन, अब समय आ गया है कि हम सर्फ उत्पादन की सोच से बाहर निकलें और ब्रांडिंग, स्थिरता और प्रोसेसिंग पर ध्यान दें।
चावल की पूरी वैल्यू चेन पर फोकस मंत्री ने चावल की खेती से लेकर रसोई तक की पूरी श्रृंखला को आधुनिक बनाने का आह्वान किया। इसके लिए उन्होंने चार मुख्य स्तंभ बताए:
2047 का विजन: भारत बनेगा दुनिया का फूड बास्केट प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत 2047 के सपने को दोहराते हुए चिराग पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। भारत न केवल अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, बल्कि वह पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मुख्य भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
वैश्विक व्यापार में 40% हिस्सेदारी की जिम्मेदारी वैश्विक चावल व्यापार में भारत की करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी है। मंत्री के अनुसार, यह उपलब्धि हमारे लिए एक शक्ति भी है और एक बड़ी जिम्मेदारी भी। उन्होंने निर्यातकों से अपील की कि वे सहयोगी देशों के साथ मिलकर वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को अपनाएं।
मेक इन इंडिया और स्वदेशी तकनीक चिराग पासवान ने जोर दिया कि चावल उद्योग से जुड़ी मशीनरी और आधुनिक उपकरण अब स्वदेशी होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सप्तधारा में शामिल विनिर्माण और कृषि क्षेत्र के तालमेल से ही लागत कम होगी। स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देकर सरकार कृषि को केवल कच्चे माल के उत्पादन से बदलकर एक आधुनिक और उच्च-मूल्य वाले उद्योग के रूप में स्थापित करना चाहती है।
यह स्पष्ट है कि भारत अब वैश्विक बाजार में केवल एक सप्लायर नहीं, बल्कि एक क्वालिटी लीडर के रूप में अपनी धाक जमाने की तैयारी कर रहा है।
Delhi: Union Minister Chirag Paswan, speaking at the India International Rice Conference, says, “I believe that agriculture is one of the most important sectors in our country. India is one of the largest producers, consumers and exporters of rice, contributing around 40 per cent… pic.twitter.com/bJGt31KIGV
— IANS (@ians_india) October 23, 2026
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