पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि गलवान घाटी की घटना के बाद यह संदेश साफ हो गया है कि सीमा विवाद का समाधान सैन्य बल से संभव नहीं है।
सीमा विवाद और गलवान का सबक जनरल नरवणे ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और विवादित सीमा के बीच अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गलवान घाटी की हिंसक झड़प ने दोनों देशों को यह समझने पर मजबूर किया कि सैन्य टकराव से कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। भारत ने हमेशा एकतरफा बल प्रयोग के जरिए सीमाओं को बदलने की कोशिशों को सख्ती से नकारा है, जिससे बातचीत और कूटनीति के रास्ते मजबूत हुए हैं।
वैश्विक मंच पर मजबूत हुआ भारत पूर्व सेना प्रमुख के अनुसार, गलवान के बाद भारत की कूटनीतिक, सैन्य और राजनीतिक स्थिति विश्व स्तर पर पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने भारत को वैश्विक मंच पर अपनी बात मजबूती से रखने का अवसर दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा में इजाफा हुआ है।
विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता की अहमियत विवाद के समाधान के लिए जनरल नरवणे ने विशेष प्रतिनिधियों के बीच होने वाली वार्ता को सबसे महत्वपूर्ण तंत्र बताया है। 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई 25वें दौर की बातचीत इसी कड़ी का हिस्सा थी। यह तंत्र सीमा पर शांति बनाए रखने और भविष्य के लिए एक दीर्घकालिक समाधान खोजने का मुख्य माध्यम बना हुआ है।
देपसांग और डेमचोक: सुधरते हालात अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में गश्त को लेकर बनी सहमति भारत और चीन के बीच संबंधों में एक सकारात्मक मोड़ साबित हुई है। हालांकि, यह समझौता पूरे सीमा विवाद का अंत नहीं है, लेकिन इसने 2020 के बाद से बने तनावपूर्ण माहौल को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
आगे की राह: सतर्कता और संवाद जनरल नरवणे का मानना है कि भविष्य में सीमा प्रबंधन के लिए सैन्य सतर्कता के साथ-साथ निरंतर कूटनीतिक संवाद अनिवार्य है। भारत और चीन दोनों के हित इसी में हैं कि वे सीमा पर शांति बनाए रखें और जटिल मुद्दों को बातचीत की मेज पर ही सुलझाएं। यह स्पष्ट है कि दोनों देश अब संघर्ष के बजाय एक संतुलित समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
#WATCH | Pune, Maharashtra | Former Indian Army Chief General Manoj Mukund Naravane says, ...With China, we have an unsettled boundary. I use the term boundary deliberately because, unlike an international border, which is clearly demarcated and internationally recognised, a… pic.twitter.com/81vYiZJcnb
— ANI (@ANI) October 22, 2026
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