अरुणाचल में फेस-ऑफ और लद्दाख पर तकरार: भारत-चीन सीमा पर फिर क्यों बढ़ी हलचल?
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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार तनाव की खबरें किसी अनौपचारिक दावे से नहीं, बल्कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के बयान से सामने आई हैं।

अरुणाचल में क्या है स्थिति? ITBP प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कई हिस्सों में चीनी सेना (PLA) के साथ फेस-ऑफ (आमना-सामना) जारी है। हालांकि, इसे सीधे युद्ध या गोलीबारी की स्थिति नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह साफ है कि सीमा के कुछ संवेदनशील इलाकों में दोनों देशों के सैनिक अपनी-अपनी स्थिति पर डटे हुए हैं।

तवांग से ताकसिंग तक बढ़ी चिंता रिपोर्ट्स के अनुसार, अरुणाचल का तवांग, ऊपरी सुबनसिरी जिले का ताकसिंग, असफिला और माजा क्षेत्र सबसे अधिक चर्चा में हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि असफिला के पास चीनी सैनिकों ने भारतीय दावे वाली LAC के करीब 6-7 किलोमीटर अंदर तक टेंट लगाए हैं। इन घटनाओं ने स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

भारत की नई तैयारी: शौर्य कमांडो और ड्रोन सीमा पर जारी तनाव के बीच भारत ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को अत्याधुनिक बनाया है। ITBP ने शौर्य कमांडो (Shaurya Commandos) की एक विशेष लड़ाकू टीम तैयार की है। इसके साथ ही:

कूटनीति और विवाद का दोहरा खेल दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ सैन्य तनाव है, तो दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हैं। अगस्त 2026 में एनएसए अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता हुई थी। इसके बावजूद अरुणाचल में फेस-ऑफ का जारी रहना यह बताता है कि कूटनीतिक बातचीत और जमीन पर सैन्य प्रबंधन के बीच अभी भी बड़ी चुनौतियां कायम हैं।

लद्दाख में नामों की जंग तनाव अरुणाचल तक ही सीमित नहीं है। अक्टूबर में भारत ने लद्दाख की 28 भौगोलिक जगहों के आधिकारिक नाम तय कर उन्हें सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे में शामिल किया। चीन ने इस पर कड़ा विरोध जताया, जिसे भारत ने सिरे से खारिज करते हुए लद्दाख को भारत का अभिन्न अंग बताया। यह विवाद बताता है कि सीमा का यह संघर्ष अब सिर्फ सैनिकों की तैनाती तक सीमित नहीं, बल्कि नक्शों और क्षेत्रीय दावों तक फैल चुका है।

निष्कर्ष: क्या वाकई युद्ध के हालात हैं? वर्तमान स्थिति को युद्ध की शुरुआत कहना जल्दबाजी होगी। यह एक सक्रिय सीमा प्रबंधन का दौर है, जहां एक तरफ उच्चस्तरीय बातचीत जारी है और दूसरी तरफ जमीन पर छोटी-छोटी झड़पें (फेस-ऑफ) हो रही हैं। भारत का पूरा जोर अब निगरानी, ड्रोन क्षमता और ढांचागत मजबूती पर है, ताकि 2020 के गलवान जैसे संकट से बचा जा सके।

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