फ्रांस की सड़कों पर इन दिनों महंगाई और बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्थिति को काबू में करने के लिए अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मैक्रों ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में उन सभी प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाएगी जिन्हें अवैध माना जाएगा।
मैक्रों का नया एक्शन प्लान राष्ट्रपति मैक्रों ने खुफिया अधिकारियों और मंत्रियों के साथ बैठक के बाद साफ किया कि जो प्रदर्शन ट्रेड यूनियनों जैसे अधिकृत संगठनों द्वारा आयोजित नहीं हैं, उन्हें प्रशासन हर संभव तरीके से रोकेगा। सरकार यूनियनों को प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक रास्ते सुझाएगी ताकि व्यापार पर असर कम पड़े। मैक्रों ने दंगों के पीछे अति-वामपंथी समूहों का हाथ बताया है, हालांकि उन्होंने फिलहाल आपातकाल लागू करने से इनकार किया है।
फ्रांस में जमीनी स्थिति और गिरफ्तारी मैक्रों के इस ऐलान के बाद ल्यों जैसे शहरों में प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। पेरिस के कुछ हिस्सों में भी सख्ती बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच अब तक करीब 400 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फ्रांस में नियम यह है कि प्रदर्शन के लिए तीन दिन पहले सूचना देना अनिवार्य है, और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में प्रशासन इसे रद्द कर सकता है।
भारत: अनुच्छेद 19 और प्रदर्शन की सीमाएं भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार प्रदर्शन का हक देता है। हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था के नाम पर सरकार इस पर प्रतिबंध लगा सकती है। दिल्ली में कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। हाल ही में धारा 163 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत निषेधाज्ञा लागू करने और जंतर-मंतर से जुड़े विवादों ने कानून और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
नेपाल: जिला प्रशासन की सर्वोच्चता नेपाल में प्रदर्शन का अधिकार नागरिकों को तो है, लेकिन स्थानीय प्रशासन अधिनियम 1971 के तहत मुख्य जिला अधिकारी (CDO) के पास बहुत ताकत है। संवेदनशील क्षेत्रों में प्रदर्शन रोकना या कर्फ्यू लगाना उनके अधिकार क्षेत्र में है। सितंबर 2025 में सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान नेपाल में हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।
बांग्लादेश: अनुमति और कड़े कानून बांग्लादेश में सार्वजनिक सभा के लिए पुलिस कमिश्नर से सात दिन पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस अध्यादेश की धारा 29 के तहत अनुमति के बिना सभा करने पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के जाने के बाद अंतरिम सरकार ने सभा करने के अधिकारों को बहाल किया था, लेकिन आतंकवाद-रोधी कानूनों में संशोधन के जरिए अभी भी कुछ गतिविधियों पर निगरानी और रोक जारी है।
क्या है प्रदर्शन का अधिकार? दुनियाभर में इन घटनाओं ने एक बार फिर बहस को जन्म दिया है कि लोकतंत्र में विरोध का दायरा कहां तक होना चाहिए। जहां एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, वहीं सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और हिंसा को रोकने के लिए सरकारों की सख्ती को भी सुरक्षा के नाम पर उचित ठहराया जा रहा है। फ्रांस में जारी ये घटनाक्रम दिखाते हैं कि कैसे आर्थिक असंतोष का असर सीधे कानून-व्यवस्था की नीतियों में बदलाव के रूप में सामने आता है।
🇫🇷France erupts.
— Rajat Jain (@RajatJain) October 18, 2026
⁰Fuel prices, living costs, crumbling schools and a budget plan freezing benefits brought 550,000 onto the streets, by the government s own count.
From Paris to Dijon, the chant was Macron DEMISSION.
⁰Then came 1,200 arrests, 150 police hurt and Limoges … pic.twitter.com/h8zXJAj5Fg
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