उत्तराखंड के काशीपुर में पुरातत्व विभाग (ASI) ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों को खंगालना शुरू कर दिया है। 90 एकड़ में फैले एक विशाल टीले पर खुदाई का काम शुरू हो चुका है, जो मार्च तक चलेगा। यह स्थान न केवल महाभारत कालीन परंपराओं से जुड़ा है, बल्कि चीनी यात्री शुआनजांग के यात्रा वृत्तांतों का भी गवाह रहा है।
स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, यह वही पवित्र भूमि है जहाँ पांडवों और कौरवों के गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम था। माना जाता है कि पांडवों ने गुरु दक्षिणा के रूप में अपने गुरु के लिए द्रोण सागर झील का निर्माण किया था। अब ASI की खुदाई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यहाँ वास्तव में उस काल के कोई भौतिक प्रमाण मौजूद हैं।
इतिहास के पन्नों में इस जगह की पहचान प्राचीन गोविषाण बस्ती के रूप में है। 7वीं शताब्दी में भारत यात्रा पर आए चीनी विद्वान शुआनजांग ने अपने ट्रैवलॉग में इस स्थान का विस्तार से जिक्र किया था। ब्रिटिश पुरातत्वविद अलेक्जेंडर कनिंघम ने भी इसी साक्ष्य के आधार पर काशीपुर की पहचान उस प्राचीन सभ्यता वाले क्षेत्र के रूप में की थी।
इससे पहले भी 1939 से 1971 के बीच यहाँ कई बार खुदाई हो चुकी है। पूर्व में मिली भीम-गजा नामक जगह पर एक प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंदिर तीन चरणों में बना था। इसकी शुरुआत गुप्त काल में मिट्टी की ईंटों से बनी एक चबूतरे के रूप में हुई थी, जिसे बाद में छठी-सातवीं शताब्दी में और विस्तार दिया गया।
ASI के देहरादून सर्कल के सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट मोहन जोशी के अनुसार, इस नई खुदाई का उद्देश्य केवल मंदिर के ढांचे को समझना नहीं, बल्कि यहाँ के पूरे कल्चरल सीक्वेंस (सांस्कृतिक क्रम) को उजागर करना है। यहाँ से पूर्व में पेंटेड ग्रे वेयर (मिट्टी के बर्तन) मिल चुके हैं, जो महाभारत काल की बस्तियों से जुड़े माने जाते हैं।
खुदाई में अब तक ईंटों की संरचनाएं और एक गोलाकार ढांचा सामने आया है। यहां कुषाण, गुप्त और मध्यकालीन दौर के मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह जगह सदियों तक मानवीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रही है। फिलहाल ASI जुटाए गए सबूतों का वैज्ञानिक परीक्षण कर रहा है, ताकि इस जगह को पर्यटन और शोध के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
*Excavated by the Archaeological Survey of India between 1960s-2000s, the ancient temple site of Dronasagar, Kashipur, Uttarakhand revealed a fascinating history.
— Archaeological Survey of India (@ASIGoI) January 9, 2025
Starting as a brick structure in the Gupta period, (1/3) pic.twitter.com/jrVkZP8EAp
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