दिल्ली में सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहाई मिल गई। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) ने दोनों नेताओं को जमानत पर छोड़ने का आदेश जारी कर दिया है। रिहाई पाने के लिए उन्हें कुछ शर्तों का पालन करना होगा।
क्या है जमानत की शर्तें? अदालत ने दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया था। मुचलके भरने के बाद एसीपी रितु राज ने उनकी रिहाई का आदेश दिया। कोर्ट ने शर्त रखी है कि दोनों नेता शांति भंग नहीं करेंगे और जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थल घोषित न किए जाने तक वहां विरोध-प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
कोर्ट ने क्यों दी राहत? मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जो निवारक उपाय जरूरी थे, वे अब मुचलके और लिखित हलफनामे से पूरे हो गए हैं। कोर्ट ने कहा कि दोनों नेताओं द्वारा दिए गए आश्वासनों के बाद अब उन्हें न्यायिक हिरासत में रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।
पुलिस की मांग हुई खारिज इससे पहले पुलिस ने कोर्ट से दास और रांका की न्यायिक हिरासत को और तीन दिन बढ़ाने का अनुरोध किया था। पुलिस का तर्क था कि उनके पिछले आचरण और मीडिया बयानों के कारण कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस की इस दलील को पर्याप्त नहीं माना और जमानत मंजूर कर दी।
जेल से बाहर आते ही प्रतिक्रिया रिहाई के बाद सौरव दास ने सोशल मीडिया पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, ज्ञानू को जाना है। वहीं, साथी नेता अभिजीत दीपके ने दोनों के साथ वीडियो कॉल का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा, अगर निडरता का कोई चेहरा होता। यह घटनाक्रम दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच काफी चर्चा में है।
If fearlessness had a face. pic.twitter.com/Kxx1z1rynL
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) October 21, 2026
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