अभिजीत दीपके का घर वापसी का इशारा, पर प्रशांत भूषण ने फूंका आंदोलन का बिगुल
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने अभियान को विराम देते हुए समर्थकों से घर लौटने की अपील की थी। लेकिन, उनके इस बयान के 24 घंटे के भीतर ही राजनीतिक समीकरण बदलते दिखे।

अब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और दीपके के सहयोगी प्रशांत भूषण ने 23 अक्टूबर (शुक्रवार) को पीपल्स मार्च निकालने का बड़ा ऐलान कर दिया है। आश्चर्य की बात यह है कि इस मार्च में खुद अभिजीत दीपके का नाम भी शामिल है।

पीपल अगेंस्ट SIR का मोर्चा

प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया के जरिए पीपल अगेंस्ट SIR (People Against SIR) बैनर तले इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। उन्होंने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए देशभर में जंतर-मंतर जैसे विरोध प्रदर्शन शुरू करने की बात कही है।

लोकतंत्र पर गंभीर संकट का दावा

प्रशांत भूषण ने अपने पत्र में तीखे लहजे में कहा कि भारतीय लोकतंत्र गहरे संकट में है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया को हाईजैक कर लिया गया है और चुनाव आयोग निष्पक्षता छोड़ केवल सत्ता की सेवा कर रहा है। भूषण ने युवाओं, किसानों, मजदूरों और विभिन्न नागरिक संगठनों से सड़क पर उतरने की अपील की है।

विपक्षी दलों से साथ आने की गुहार

इस आंदोलन को विस्तार देने के लिए प्रशांत भूषण ने विपक्षी INDIA गठबंधन के दलों से भी मार्च में शामिल होने का आग्रह किया है। उन्होंने हर हाथ में तिरंगा और हर गली में जंतर-मंतर का नारा देते हुए एक व्यापक जन आंदोलन की नींव रखने का दावा किया है।

आंदोलन की मुख्य मांगें

यह मार्च 7 सूत्रीय मांगों को लेकर निकाला जा रहा है, जिसमें प्रमुख हैं:

  1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाकर उन पर मुकदमा चलाना।
  2. SIR प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म करना और मतदाता सूची में सुधार।
  3. चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 के संशोधन को रद्द करना।
  4. ईवीएम की जगह वापस पेपर बैलेट व्यवस्था लागू करना।
  5. निष्पक्ष चुनावी सुधार और मतदाता सूची का सही पुनरीक्षण।

मार्च में शामिल दिग्गज

प्रशांत भूषण द्वारा जारी सूची के अनुसार, इस पीपल्स मार्च में प्रकाश राज, प्रशांत भूषण, पराकला प्रभाकर, राकेश टिकैत, अंजलि भारद्वाज, गणेश देवी, तुषार गांधी, अभिजीत दीपके, नेहा बोरा, आइशी घोष और विराज देवांग जैसे प्रभावशाली नाम शामिल होंगे। अब देखना यह होगा कि दीपके की घर वापसी की अपील के बाद यह मार्च कितना असरदार साबित होता है।

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