ताने झेलकर बनीं गोल्डन गर्ल : दीप्ति जीवनजी ने रचा इतिहास, एशियन पैरा गेम्स में फिर गूंजा भारत का नाम
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कभी उन्हीं लोगों ने दीप्ति जीवनजी के माता-पिता को उन्हें अनाथालय छोड़ने की सलाह दी थी, जो आज उनकी बेटी की सफलता पर गर्व कर रहे हैं। जापान के नागोया में जारी एशियन पैरा गेम्स 2026 में तेलंगाना की दीप्ति ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हौसले के सामने कोई भी शारीरिक या मानसिक चुनौती टिक नहीं सकती।

गोल्ड के साथ बनाया नया रिकॉर्ड 23 वर्षीय दीप्ति जीवनजी ने महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में 56.36 सेकंड का समय लेकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने नया गेम्स रिकॉर्ड भी स्थापित कर दिया है। यह एशियन पैरा गेम्स में दीप्ति का दूसरा गोल्ड मेडल है, इससे पहले उन्होंने 2023 में हांगझोऊ गेम्स में भी तिरंगा लहराया था।

अनाथालय की सलाह से विश्व मंच तक का सफर दीप्ति का जन्म तेलंगाना के वारंगल जिले में हुआ था। जन्म से बौद्धिक दिव्यांगता के कारण बचपन में उन्हें गंभीर सामाजिक दुर्व्यवहार और लोगों के तानों का सामना करना पड़ा। उनके शारीरिक बनावट पर सवाल उठाए गए और माता-पिता को समाज द्वारा उन्हें त्यागने तक का दबाव दिया गया। दिहाड़ी मजदूरी करने वाले उनके माता-पिता ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी बेटी को संबल दिया।

कैसे मिली कामयाबी की राह? दीप्ति की प्रतिभा को सबसे पहले उनके स्कूल के पीई टीचर बियानी वेंकटेश्वरलू ने पहचाना। नौवीं कक्षा से दौड़ना शुरू करने वाली दीप्ति को कोच नागपुरी रमेश ने तराशा। खेल दिग्गज पुलेला गोपीचंद की सलाह पर उनके सही आकलन के बाद वे पैरा एथलेटिक्स की दुनिया में आईं और आज वह देश का गौरव बन चुकी हैं।

भारत को मिले अन्य पदक दीप्ति के अलावा भारत के अन्य एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। भाला फेंक (पुरुषों की F53/F54 स्पर्धा) में प्रदीप कुमार ने 27.45 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक (सिल्वर मेडल) जीता। इसी स्पर्धा में आयुष वर्मा ने कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक और मेडल डाला।

टेबल टेनिस में भाविना का जलवा टोक्यो पैरालंपिक की पदक विजेता भाविना पटेल ने भी टेबल टेनिस में अपना दबदबा कायम रखा है। हालांकि वे सेमीफाइनल में चीनी खिलाड़ी से हार गईं, लेकिन उन्होंने कांस्य पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित कर दी है। दीप्ति, प्रदीप और भाविना की जीत भारतीय खेल जगत के लिए एक प्रेरणादायक अध्याय है, जो यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत का फल हमेशा स्वर्ण की तरह चमकता है।

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