यूरोप महाद्वीप इस समय गहराते आर्थिक संकट और जनआक्रोश की चपेट में है। फ्रांस से लेकर बेल्जियम तक, छह देशों में हालात बेकाबू हो गए हैं। महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी और आवास संकट को लेकर आम नागरिक से लेकर छात्र तक सड़कों पर उतर आए हैं। कहीं सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाया जा रहा है, तो कहीं स्कूलों पर कब्जा कर लिया गया है।
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों ने सबसे हिंसक रूप ले लिया है। करीब 140 शहरों में 8 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस और लीमोज जैसे शहरों में भीड़ ने ऐतिहासिक इमारतों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया। 18 अक्टूबर तक करीब 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि सैकड़ों सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए इसे अराजकता करार दिया है।
अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट, बैंकों और डाकघरों की इमारतों को निशाना बनाया है। विरोध की शुरुआत एक विवादित पर्यटन परियोजना से हुई थी, लेकिन अब यह बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े जनांदोलन में तब्दील हो चुका है। पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियों का सहारा लिया है।
इटली के मिलान समेत प्रमुख शहरों में छात्रों ने महंगाई के विरोध में स्कूलों पर कब्जा कर लिया है। छात्रों का कहना है कि आसमान छूती कीमतों के चलते शिक्षा और जीवनयापन कठिन हो गया है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उपद्रवियों को सख्त चेतावनी दी है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि 30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है।
स्पेन में आवास संकट ने लोगों को सड़क पर ला दिया है। घर के बढ़ते किराए के कारण आम नागरिकों को बेदखल किया जा रहा है, जिससे भारी गुस्सा है। वहीं, ग्रीस में छात्र संसद के बाहर तंबू लगाकर बैठ गए हैं। भारी बारिश के बावजूद छात्र सस्ते छात्रावासों और पढ़ाई के खर्च में कमी की मांग को लेकर अपनी जिद पर अड़े हैं।
बेल्जियम में बजट योजनाओं और शिक्षा में प्रस्तावित बदलावों के खिलाफ श्रमिक संगठनों और छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। ब्रुसेल्स में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं। कर्मचारियों को डर है कि सरकार की मितव्ययता नीतियां उनके वेतन और पेंशन को पूरी तरह खत्म कर देंगी।
यूरोप के इन देशों में छिड़ा यह आंदोलन साफ संकेत देता है कि आम लोगों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। सरकारें जहाँ इसे कुछ हिंसक समूहों की साजिश बता रही हैं, वहीं जनता इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई मानकर सड़कों पर डटी हुई है।
BREAKING | Large-scale protests have begun in Italy s Milan.
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) October 17, 2026
European cities that have seen protests so far:
•🇫🇷 France:
Paris, Marseille, Lyon, Toulouse, Rennes, Montpellier, and Grenoble.
•🇮🇹 Italy:
Milan, Rome, Turin, Bologna, Naples, Genoa, Florence, and Venice.
•🇧🇪…
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