भारत में रिजीम चेंज की साजिश: मोहन भागवत की चेतावनी, कहा- देश को तोड़ने में जुटीं आसुरी ताकतें
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नागपुर में विजयादशमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने देश की आंतरिक और बाह्य स्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत को अस्थिर करने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है।

रिजीम चेंज का एजेंडा

संघ प्रमुख ने साफ तौर पर कहा कि आज देश के अंदर कुछ बुरी ताकतें भारत को खत्म करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सत्ता के भूखे नेता इन विदेशी ताकतों के साथ मिले हुए हैं। उनका मकसद देश का सुधार नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन कर खुद को गद्दी पर बिठाना है।

बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात की आहट

भागवत ने चेतावनी दी कि भारत में भी फ्रांस और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने पश्चिम से चली एक ऐसी आंधी का जिक्र किया, जो हर देश की सांस्कृतिक जड़ों को नष्ट करना चाहती है। उन्होंने दोटूक कहा, रिजीम चेंज करने से हालात नहीं बदलते, न ऐसा पहले हुआ है और न आगे होगा।

आंदोलन का अर्थ केवल समाधान

लोकतांत्रिक विरोध और आंदोलनों पर टिप्पणी करते हुए भागवत ने कहा कि आंदोलन का लक्ष्य समाधान होना चाहिए, न कि अराजकता। उन्होंने कहा कि जब आंदोलन किसी राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित होते हैं, तो वे समाज में केवल द्वेष और विभाजन पैदा करते हैं। उन्होंने आगाह किया कि समाज को उत्तेजित करने की हर कोशिश से सतर्क रहना होगा।

भारत का बढ़ता पुरुषार्थ ही आसुरी शक्तियों की चुनौती

संघ प्रमुख ने दावा किया कि भारत की विकास नीति और नई पीढ़ी के पुरुषार्थ ने आसुरी ताकतों के खेल को थाम दिया है। यही कारण है कि भारत आज इन ताकतों का मुख्य लक्ष्य बना हुआ है। उन्होंने कहा कि देश केवल नेताओं से नहीं, बल्कि समाज की सक्रियता से चलता है।

घावों को भरने का समय, नई समस्याएं नहीं

अपने संबोधन में भागवत ने ऐतिहासिक संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें अतीत के घावों को भरने की जरूरत है। उन्होंने कहा, आइये, हम नई समस्याएं पैदा न करें। इस दौरान उन्होंने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए इसे हिंदू स्वभाव और स्वाभाविक चेतना का प्रतीक बताया।

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