कर्ज के संकट के बीच पाकिस्तान को बड़ी कामयाबी, 73 साल बाद संभालेगा IMF-विश्व बैंक बोर्ड की कमान
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आर्थिक तंगी और भारी विदेशी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी खबर सामने आई है। पाकिस्तान को साल 2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह (WBG) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता सौंपी गई है। बैंकॉक में चल रही वार्षिक बैठकों के दौरान यह घोषणा की गई।

73 साल बाद मिला ऐतिहासिक सम्मान पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय के अनुसार, यह जिम्मेदारी देश के लिए बेहद खास है क्योंकि 1953 के बाद पहली बार पाकिस्तान को यह वैश्विक भूमिका निभाने का मौका मिला है। इस पद के लिए पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री अहद खान चीमा को नामित किया गया है।

अध्यक्ष की भूमिका क्या होगी? बोर्ड ऑफ गवर्नर्स IMF और विश्व बैंक की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। इस बोर्ड में सदस्य देशों के वित्त मंत्री या केंद्रीय बैंक के गवर्नर शामिल होते हैं। अध्यक्ष का मुख्य काम बैठकों का संचालन करना, सदस्य देशों के बीच संवाद को सुविधाजनक बनाना और वैश्विक आर्थिक नीतियों पर चर्चा को आगे बढ़ाना होता है।

क्या कर्ज मिलना होगा आसान? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस अध्यक्षता से पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें कम होंगी? विशेषज्ञ मानते हैं कि यह उपलब्धि पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर डिप्लोमैटिक वेटेज तो देगी, लेकिन इससे कर्ज मिलने की शर्तें सीधे तौर पर नहीं बदलेंगी।

IMF किसी भी देश को वित्तीय सहायता देने से पहले उसकी अर्थव्यवस्था, महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार और सुधारों की प्रगति का कड़ा मूल्यांकन करता है। अध्यक्ष होने का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान अपनी मर्जी से शर्तें लागू करा लेगा या आसानी से कर्ज हासिल कर लेगा।

पाकिस्तान के लिए मायने क्या हैं? हालांकि यह पद सीधे तौर पर कर्ज नहीं दिलाता, लेकिन यह पाकिस्तान को विकासशील देशों की आर्थिक चिंताओं को प्रमुखता से रखने का मौका जरूर देगा। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनाने और अपनी बात को मजबूती से रखने के मामले में यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।

अब देखना यह होगा कि क्या 2027 में यह भूमिका पाकिस्तान की डगमगाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में कोई ठोस मदद कर पाती है या नहीं।

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