मुंब्रा की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आने वाले वक्त में पूरे मुंब्रा को हरा कर देंगे जैसा विवादास्पद बयान देकर सुर्खियों में आई AIMIM पार्षद सहर शेख के पिता यूनुस शेख अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना (बालसाहेबांची शिवसेना) के करीब दिखाई दे रहे हैं।
क्या है मामला? हाल ही में यूनुस शेख की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें वे शिंदे गुट के नेताओं के साथ नजर आ रहे हैं। उन्हें कलवा-मुंब्रा केबल सेना का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने का दावा किया जा रहा है। इस नियुक्ति के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सहर शेख के पिता ने पाला बदल लिया है।
यूनुस शेख का स्पष्टीकरण विवाद बढ़ता देख यूनुस शेख ने सफाई दी है। उन्होंने शिवसेना में शामिल होने की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, मैं पिछले 40 साल से केबल ऑपरेटर का काम कर रहा हूँ। अखिल भारतीय केबल सेना केबल ऑपरेटरों के हक के लिए काम करने वाला एक संगठन है, जिसने मुझे स्थानीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसका राजनीतिक दल में शामिल होने से कोई लेना-देना नहीं है।
अतीत और कैसा हराया का विवाद यूनुस शेख पहले NCP नेता जितेंद्र आव्हाड के करीबी माने जाते थे। हालांकि, बीते नगर निगम चुनावों में टिकट न मिलने पर उन्होंने बेटी सहर शेख को AIMIM से चुनावी मैदान में उतारा। सहर शेख चुनाव जीत गईं और उन्होंने मंच से कैसा हराया कहते हुए आव्हाड पर सीधा निशाना साधा था।
क्या था वो विवादास्पद बयान? सहर शेख तब सबसे ज्यादा चर्चा में आई थीं जब उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा था, अगले 5 साल में मुंब्रा में हर उम्मीदवार AIMIM का होगा। पूरे मुंब्रा को हरे रंग में रंग देंगे। उनके इस बयान को सांप्रदायिक बताते हुए चारों तरफ से आलोचना हुई थी।
माफी और सफाई बवाल बढ़ता देख सहर शेख ने बचाव करते हुए कहा था कि उन्होंने यह बात केवल अपनी पार्टी के हरे झंडे के संदर्भ में कही थी। उन्होंने तर्क दिया था कि अगर पार्टी का झंडा केसरिया होता, तो वह उसी रंग की बात करतीं। विवाद को तूल पकड़ता देख सहर ने अंततः सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग ली थी।
अब पिता के नए संगठन से जुड़ने के बाद, इस पूरे घटनाक्रम पर एक बार फिर मुंब्रा की स्थानीय राजनीति में बहस छिड़ गई है।
Kaisa Haraya fame AIMIM Corporator from Mumbra Sahar Shaikh Yunus father Haji Yunus Shaikh joined Eknath Shinde Shivsena.
— Prashant Kanojia (@KanojiaPJ) October 15, 2026
Such people don t even have an ideology. Most of the AIMIM leaders are useless non serious and lack of ideological commitment. pic.twitter.com/lxpbuphjWk
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