सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से बेबाक अंदाज में कहा है कि देश में मौजूदा सत्ता को बदलना जरूरी है और यह हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
सत्ता परिवर्तन में गलत क्या है? प्रशांत भूषण ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और अभिनेता प्रकाश राज के साथ एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, हां, हम सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। इसमें गलत क्या है? बीजेपी ने भी तो अतीत में सत्ता बदलने के लिए कई आंदोलन किए हैं।
राजद्रोह कानून और प्रदर्शनकारियों का बचाव भूषण ने सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर सरकार गिराने की साजिश रचने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि सत्ता बदलना किसी नागरिक का अधिकार है, न कि कोई अपराध। इसी आधार पर उन्होंने ब्रिटिश काल के राजद्रोह कानून को असंवैधानिक बताने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया।
क्यों गरमाया है सियासी माहौल? राजधानी दिल्ली में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की आग तेज हो गई है। इसका मुख्य कारण SIR (एसआईआर) विवाद और मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने का मुद्दा है। विपक्ष और कई छात्र संगठनों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ की गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग विरोध कर रहे संगठनों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें या उन पर महाभियोग चलाया जाए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मतदाता सूची को पुरानी स्थिति में बहाल किया जाए और ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुए सभी चुनावों को रद्द घोषित किया जाए।
भीतरखाने से सामने आया SIR विवाद हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स ने इस विवाद को और हवा दे दी है। खबरों के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने 10 महीनों के भीतर 14 बार SIR प्रक्रिया पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी खुलासे के बाद से विपक्ष और नागरिक संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन को और आक्रामक बना दिया है।
Delhi: Advocate Prashant Bhushan says, There will definitely be a regime change. We all want a regime change. Is there anything wrong with that?... pic.twitter.com/vUDowEBAI8
— IANS (@ians_india) October 15, 2026
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