क्या भारत में CJP का प्रोटेस्ट अमेरिका से हो रहा स्पॉन्सर्ड? सिंगर मैरी मिलबेन के दावे से मचा हड़कंप
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नई दिल्ली: भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हालांकि, इस बार यह प्रदर्शन न केवल प्रशासनिक सख्ती का सामना कर रहा है, बल्कि इसे लेकर एक ऐसा गंभीर दावा किया गया है जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

अमेरिका से मिल रही फंडिंग का आरोप

मशहूर अमेरिकी सिंगर और एक्ट्रेस मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक सनसनीखेज दावा किया है। मिलबेन का आरोप है कि CJP और इसके प्रमुख अभिजीत दिपके को अमेरिका में बैठे उन डोनर्स से फंडिंग मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर विरोधी हैं।

मिलबेन ने भारतीय युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह समय चुप रहने का नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर इशारा किया कि विदेशी ताकतें भारत के भविष्य और नेतृत्व को अस्थिर करने के लिए धन मुहैया करा रही हैं।

बेअसर रहा जंतर-मंतर का प्रदर्शन

CJP पिछले दो हफ्तों से CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर लामबंद है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, लेकिन भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण यह आंदोलन अपेक्षित जोर नहीं पकड़ सका।

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके समेत पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। दिलचस्प बात यह है कि पिछले आंदोलनों में सक्रिय रहे चेहरे, जैसे सोनम वांगचुक, इस बार मुख्य रूप से इस प्रदर्शन से दूरी बनाए हुए दिखे, हालांकि उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना नैतिक समर्थन जरूर जाहिर किया।

कौन हैं मैरी मिलबेन?

मैरी मिलबेन अमेरिका का एक जाना-माना नाम हैं। वे जॉर्ज डब्लू बुश से लेकर जो बाइडेन तक, कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के आधिकारिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। मिलबेन प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसक रही हैं और उन्होंने सार्वजनिक रूप से भारत का राष्ट्रगान जन गण मन और भजन ओम जय जगदीश हरे गाकर भारत के प्रति अपना लगाव प्रदर्शित किया है।

अपनी मुखरता के लिए पहचानी जाने वाली मिलबेन का यह दावा अब CJP की मंशा और उनके वित्तीय स्रोतों पर बड़े सवाल खड़ा कर रहा है।

क्या हैं इसके मायने?

पिछली बार जेन-जी के विरोध प्रदर्शन ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक की स्थिति पैदा कर दी थी। लेकिन इस बार का परिदृश्य पूरी तरह अलग है। विदेशी फंडिंग के आरोपों ने इस पूरे आंदोलन को एक नई दिशा दे दी है, जहां अब सीजेपी को जनता के साथ-साथ अब अपनी विश्वसनीयता को लेकर भी सफाई देनी पड़ सकती है।

फिलहाल, इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है और सुरक्षा एजेंसियां इस विदेशी कनेक्शन की बारीकियों को समझने में जुटी हो सकती हैं।

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