नई दिल्ली: 13 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे ने दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मुरुगन ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से तीन साल पहले ही इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। यह घटना किसी बड़े बदलाव का महज एक हिस्सा है। आइए उन 5 संकेतों को समझते हैं जो मोदी कैबिनेट में आसन्न फेरबदल की पुष्टि करते हैं।
मुरुगन का इस्तीफा सामान्य नहीं है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट कहा है कि वह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में संगठन को मजबूत करने के लिए ग्रासरूट पर लौटना चाहते हैं। पिछले चार महीनों में यह तीसरे केंद्रीय मंत्री हैं जिन्होंने इस्तीफा दिया है। इससे साफ है कि भाजपा अपनी चुनावी रणनीति के लिए वरिष्ठ नेताओं को संगठन में वापस भेज रही है।
राष्ट्रपति ने हाल ही में जिन छह राज्यों में राज्यपाल नियुक्त किए हैं, उनमें से चार पूर्व सांसद और भाजपा की संसदीय समितियों के वरिष्ठ सदस्य रहे हैं। ब्रज मोहन राम, सुधा यादव, धल सिंह बिसेन और दुष्यंत गौतम जैसे दिग्गजों को संवैधानिक पदों पर भेजकर भाजपा ने केंद्रीय राजनीति में जगह खाली की है। यह संकेत है कि पार्टी अब नई पीढ़ी को आगे लाने की तैयारी में है।
वर्तमान में कई मंत्रियों के सामने संवैधानिक संकट है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत चार राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। यदि उन्हें दोबारा संसद नहीं भेजा जाता, तो उन्हें पद छोड़ना होगा। वर्तमान में मंत्रिपरिषद में 12 पद पहले से खाली हैं। नियमों के अनुसार फेरबदल अब अनिवार्य हो गया है ताकि सरकार का कामकाज सुचारू रूप से चल सके।
फिलहाल अमित शाह, जे.पी. नड्डा और शिवराज सिंह चौहान समेत 12 मंत्री एक से अधिक मंत्रालयों का प्रभार संभाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार अब एक मंत्री, एक मंत्रालय के सिद्धांत पर काम करने की तैयारी में है। कार्यकुशलता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रभार वाले मंत्रालयों को नए चेहरों में बांटा जाएगा, जिसके लिए कैबिनेट विस्तार ही एकमात्र विकल्प है।
2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब सहित पांच बड़े राज्यों में चुनाव होने हैं। वाराणसी में हालिया भाजपा-आरएसएस बैठक और पश्चिमी यूपी में रैलियों की योजना से स्पष्ट है कि पार्टी चुनावी मोड में है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को केंद्रीय कैबिनेट में अधिक प्रतिनिधित्व देना भाजपा की प्राथमिकता है। चुनावी राज्यों के समीकरणों को साधने के लिए कैबिनेट का पुनर्गठन तय है।
कब होगा बदलाव? सरकारी सूत्रों के अनुसार, दिवाली से पहले यह फेरबदल संभावित है। इसमें महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने, सहयोगी दलों को उचित हिस्सा देने और खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों की विदाई पर जोर होगा। कुल मिलाकर, यह कवायद 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए सरकार को इलेक्शन-रेडी बनाने की एक बड़ी रणनीति है।
*It has been the greatest honour of my life to serve Bharat Mata and Tamil Nadu under the leadership of Hon’ble Prime Minister Shri @narendramodi Ji.
— Dr.L.Murugan (@DrLMurugan) October 13, 2026
From the son of daily wage labourers to serving in the Union Council of Ministers under the leadership of Hon’ble PM Shri… pic.twitter.com/V9zUtaQVI0
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