जन्मदिन पर तिहाड़ जेल पहुंचे आशुतोष रांका: CJP नेताओं को कोर्ट से बड़ा झटका
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं पर दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी के प्रमुख सदस्य सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेश किया गया।

जुडिशियल कस्टडी में सौरव और आशुतोष अदालत के आदेश के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि आशुतोष रांका का आज जन्मदिन है, जिसे उन्हें अब सलाखों के पीछे बिताना होगा। वहीं, अजिंक्य शिंदे को 5 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया, लेकिन उन्हें एक साल तक शांति भंग न करने की सख्त हिदायत दी गई है।

पुलिस और वकीलों के अपने-अपने दावे CJP के वकील अभिष्ट हेला ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा, पुलिस ने अदालत में गुमराह किया है कि नेताओं ने लोगों को प्रदर्शन के लिए उकसाया था। वास्तव में ऐसा कोई आह्वान नहीं किया गया था। पुलिस केवल आशंका के आधार पर कार्रवाई कर रही है। वहीं, पुलिस का तर्क है कि दोनों नेता रिपीट ऑफेंडर हैं और उन्होंने बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है।

अभिजीत दीपके का सीधा हमला CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लिखा, आशु और सौरव की गलती क्या है? सिर्फ जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना? अगर सरकार विरोध की आवाजों को कुचलना चाहती है, तो कायरतापूर्ण तरीकों के बजाय सीधे आपातकाल घोषित करने की हिम्मत दिखाए।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन का दावा अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ रहा है, जिन पर उन्होंने चुनावों में धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी एक स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप है और उनका मकसद सत्ता में बैठे लोगों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि CJP के किसी राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकरण की कोई योजना नहीं है।

कानूनी दांव-पेच और आरोप पार्टी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि जिस मजिस्ट्रेट (SEM) ने यह फैसला सुनाया है, उनका पहले भी प्रदर्शनकारियों को सजा देने का विवादित रिकॉर्ड रहा है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के उल्लंघन को इस गिरफ्तारी का मुख्य आधार बताया है। अब देखना यह होगा कि पांच दिन की न्यायिक हिरासत के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या रुख लेती है।

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