देशभर में वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने एक नागरिक सम्मेलन में दावा किया है कि SIR (स्पेशल इलेक्टोरल रोल) प्रक्रिया के तहत बिना किसी ठोस सबूत के केवल संदेह के आधार पर वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं।
बिना सबूत नागरिकों को हटाने का आरोप लवासा के अनुसार, यह मान लेना कि कोई व्यक्ति नागरिक नहीं है और बिना जांच के उसका नाम लिस्ट से काट देना पूरी तरह गलत है। उन्होंने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। इस सम्मेलन में रिटायर्ड IAS जवाहर सरकार और पूर्व राज्यसभा सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य जैसे कई वरिष्ठ लोग भी शामिल हुए, जिन्होंने इस प्रक्रिया को चिंताजनक बताया।
ECINET सिस्टम को लेकर कानूनी सवाल अशोक लवासा ने ECINET तक इलेक्ट्रोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) की सीमित पहुंच पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि EROs ही वोटरों के नाम हटाने के लिए अधिकृत होते हैं, लेकिन उन्हें केंद्रीय सिस्टम तक पूरी पहुंच नहीं दी गई। इसे लवासा ने गैर-कानूनी करार देते हुए कहा कि जो एजेंसी नाम जोड़ने के लिए बनी थी, आज वही इसे हटाने में जुट गई है।
इतिहास में पहली बार इतनी परेशानी पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग (EC) की मुख्य जिम्मेदारी निष्पक्ष वोटर लिस्ट बनाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल चुनाव के समय को देखते हुए, प्रक्रिया को बेहद जल्दबाजी में पूरा किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, वोटर लिस्ट में बदलाव पहले भी हुए हैं, लेकिन इतिहास में आज का मतदाता इतना परेशान कभी नहीं रहा कि उसका नाम लिस्ट में सुरक्षित है या नहीं।
EC के पूर्व अधिकारी का बचाव विपक्ष के इन तीखे आरोपों के बीच चुनाव आयोग के पूर्व संयुक्त निदेशक और प्रोटोकॉल प्रमुख मोहम्मद अमीन ने सभी दावों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि आयोग के भीतर वैचारिक मतभेद या असहमति कोई नई बात नहीं है।
अमीन ने स्पष्ट किया कि एम.एस. गिल के दौर से लेकर लवासा के कार्यकाल तक, आयुक्तों के बीच असहमति का इतिहास रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष और मीडिया का एक वर्ग एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देकर जनता में बेवजह भ्रम फैला रहा है।
Delhi: Mohd. Amin, Former Joint Director and Chief of Protocol, ECI, says, That is the usual practice. Actually, the Election Commission has not done the history. You can find that when our session was there at that time, they had a conflict with Mr. Gill. After that, you can… pic.twitter.com/xb9skF4xLs
— IANS (@ians_india) October 7, 2026
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