CJP को बड़ा झटका: आशुतोष और सौरव 5 दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजे गए, अजिंक्य शिंदे रिहा; अब आगे क्या?
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और दिल्ली पुलिस के बीच जारी तनातनी अब एक गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच गई है। संगठन के प्रमुख चेहरों, सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि अजिंक्य शिंदे को रिहा कर दिया गया है।

हिरासत से गिरफ्तारी तक का घटनाक्रम

मंगलवार सुबह CJP के नेता जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंचे थे, जहाँ पुलिस ने उन्हें अनुमति न होने का हवाला देकर हिरासत में ले लिया। बाद में स्थिति तब गंभीर हो गई जब पुलिस ने उन पर धारा 163 (BNSS) के तहत लागू प्रतिबंधों के उल्लंघन और पहले से भरे गए शांति बॉन्ड को तोड़ने का आरोप लगाया।

कानूनी मोर्चे पर तीखी बहस

अधिवक्ता अभिष्त हेल ने पुलिस की कार्रवाई को कटघरे में खड़ा किया है। उनका तर्क है कि पुलिस ने अदालत में यह झूठ बोला कि तीनों नेताओं ने भीड़ जुटाने का आह्वान किया था। वकील का दावा है कि उनके मुवक्किलों ने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया और उन्हें केवल अपराध करने की आशंका के आधार पर जेल भेजा गया है, जो कि न्यायोचित नहीं है।

पुलिस और CJP के अपने-अपने दावे

पुलिस का पक्ष है कि 11 अक्टूबर को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा हुए नेताओं ने शर्तों का उल्लंघन किया है। पुलिस ने इन पर सरकारी काम में बाधा डालने और प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने का आरोप लगाया है। वहीं, CJP की ओर से कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें कानूनी सहायता तक लेने में बाधा डाली और मनमानी कार्रवाई की।

तिहाड़ जेल और आगे का रास्ता

बुधवार सुबह विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन के लिए तिहाड़ भेज दिया गया। अब CJP के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं:

  1. कानूनी लड़ाई: न्यायिक हिरासत के आदेश और बॉन्ड उल्लंघन के आरोपों को अदालत में चुनौती देना।
  2. रणनीति: जेल में बंद नेताओं की रिहाई के साथ आंदोलन को कैसे गति दी जाए।
  3. आंदोलन का भविष्य: क्या संगठन जंतर-मंतर पर अपनी मांग जारी रखेगा या प्रशासन के साथ किसी समझौते की राह निकालेगा?

फिलहाल, CJP के लिए यह लड़ाई केवल नेताओं की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके आंदोलन की साख और भविष्य की दिशा भी तय करेगी। अदालत की अगली सुनवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।

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