अतर सिंह भड़ाना मर्डर केस: पहले लाइटें काटीं, फिर अंधेरे में घेरा; साजिश का सनसनीखेज खुलासा
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राजस्थान के भरतपुर में पूर्व बीजेपी विधायक अतर सिंह भड़ाना की नृशंस हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। माइनिंग विवाद में हुई इस मौत के मामले में अब पूर्व विधायक की सुनियोजित हत्या के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

अंधेरे का फायदा उठाकर हुआ हमला घटना के चश्मदीद और घायल सिक्योरिटी गार्ड गगन शर्मा ने हमले की खौफनाक दास्तान बयां की है। गगन के अनुसार, हमलावर अचानक पहाड़ी से नीचे उतरे। उन्होंने सबसे पहले प्लांट की लाइटें काट दीं, जिससे वहां पूरी तरह अंधेरा छा गया। गगन ने बताया कि उन्हें कुछ समझ आता, उससे पहले ही हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया और वे बेहोश हो गए।

कांग्रेस का आरोप: पुलिस की मिलीभगत या लापरवाही? कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने इस घटना को पुलिस प्रशासन की विफलता करार दिया है। उनका कहना है कि पुलिस को घटनास्थल पर चल रहे माइनिंग विवाद और गुंडागर्दी की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कानून-व्यवस्था का इतना बड़ा खतरा था, तो प्रशासन ने विवादित स्थल को सील क्यों नहीं किया?

सालों से रची जा रही थी साजिश पूर्व विधायक जीतराम चौधरी ने दावा किया है कि अतर सिंह भड़ाना को खत्म करने की योजना कोई अचानक बनी घटना नहीं थी, बल्कि लंबे समय से इसके लिए ताना-बाना बुना जा रहा था। माइनिंग को लेकर दोनों पक्षों में पिछले दो सालों से तनाव था और कई बार झड़पें भी हो चुकी थीं, लेकिन प्रशासन ने हर बार इसे नजरअंदाज किया।

अपराधियों के हौसले बुलंद घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने इसे अभूतपूर्व बताया है। उन्होंने कहा कि अगर एक जनप्रतिनिधि को दिन-दहाड़े घेरकर मार दिया जाए, तो आम जनता खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगी? गुंजल ने सख्त लहजे में कहा कि यदि अपराधियों को बेनकाब नहीं किया गया और उन्हें संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे राजस्थान में कानून का शासन खत्म हो जाएगा। उन्होंने नैतिक आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों के इस्तीफे की मांग भी की है।

क्या है विवाद की जड़? अतर सिंह भड़ाना और स्थानीय ग्रामीणों के बीच माइनिंग को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। पुलिस को इस विवाद की रोजाना रिपोर्ट दी जा रही थी, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता का नतीजा यह रहा कि रविवार को 70-80 लोगों की भीड़ ने पूर्व विधायक पर जानलेवा हमला कर दिया। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई, जिसने अब एक बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी बहस छेड़ दी है।

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