डॉ. चिन्मय पंड्या: आध्यात्मिकता से AI के वैश्विक मंच तक, भारत का नया चेहरा
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देव संस्कृति विश्वविद्यालय (DSVV) के प्रतिकुलपति और गायत्री परिवार के प्रमुख रणनीतिकार डॉ. चिन्मय पंड्या इन दिनों दो विपरीत ध्रुवों पर सक्रिय हैं। एक ओर वे वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की चुनौतियों का समाधान तलाश रहे हैं, तो दूसरी ओर भारत में राष्ट्र निर्माण के लिए जन-जागरण अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।

भारत मंडपम में राष्ट्र निर्माण का संकल्प

हाल ही में नई दिल्ली के भारत मंडपम में माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में राष्ट्र निर्माण संकल्प सम्मेलन आयोजित हुआ। इस भव्य कार्यक्रम में 1,000 से अधिक कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र सेवा का सामूहिक संकल्प लिया।

डॉ. पंड्या ने इस अवसर पर कहा कि यह समय भारतीय आध्यात्मिकता और राष्ट्र की छिपी हुई क्षमताओं को जगाने का है। उन्होंने आध्यात्मिक चेतना को सामाजिक परिवर्तन में बदलने पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके और DMRC के एमडी विकास कुमार जैसे विशिष्ट अतिथि भी शामिल हुए।

भव्य जन्म शताब्दी महोत्सव की तैयारी

माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी को यादगार बनाने के लिए अखिल विश्व गायत्री परिवार ने कमर कस ली है। आगामी 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन होगा। इसमें देश-विदेश से हजारों गायत्री परिजनों के जुटने की उम्मीद है।

जिनेवा में भारत की मजबूत दावेदारी

डॉ. पंड्या की पहचान केवल एक आध्यात्मिक गुरु की नहीं, बल्कि एक वैश्विक विचारक की भी है। जुलाई में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित जिनेवा सेंटर फॉर सिक्योरिटी पॉलिसी (GCSP) सम्मेलन में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे इस महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन में भाग लेने वाले एकमात्र भारतीय थे।

वहां उन्होंने AI से पैदा होने वाले खतरों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए साझा मानक बनाने पर दुनिया भर के वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं के साथ गहन मंथन किया।

कौन हैं डॉ. चिन्मय पंड्या?

डॉ. पंड्या का व्यक्तित्व बहुआयामी है। एक ओर वे शांतिकुंज के वरिष्ठ पदाधिकारी हैं, तो दूसरी ओर वे पेशे से एक कुशल चिकित्सक भी हैं। ब्रिटेन से मनोचिकित्सा (MRCPsych) में डिग्री लेने के बाद उन्होंने वेस्ट मिडलैंड्स में अपनी सेवाएं दी हैं।

आज वे कैम्ब्रिज, ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसे दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में भारतीय संस्कृति और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर व्याख्यान देते हैं। विज्ञान और अध्यात्म के इसी दुर्लभ संगम के कारण डॉ. पंड्या आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक प्रभावी आवाज बनकर उभरे हैं।

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