क्रशर का खूनी खेल: पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या ने खोले अवैध खनन के पुराने जख्म
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राजस्थान के भरतपुर जिले में बयाना के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की नृशंस हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। 11 अक्टूबर की शाम हुई इस वारदात ने एक बार फिर खनन माफिया, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच के उस खूनी खेल को सुर्खियों में ला दिया है, जो दशकों से अरावली की पहाड़ियों में पनप रहा है।

क्या है पूरा मामला?

घटना भरतपुर के वैर थाना क्षेत्र के भौंडा गांव की है। पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना अपनी पत्नी के नाम पर आवंटित स्टोन क्रशर प्लांट को दोबारा शुरू करने मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां पहले से ही धरने पर बैठे 70-80 ग्रामीणों के साथ उनका विवाद हो गया। देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई और भीड़ ने लाठी-डंडों से भड़ाना और उनके सुरक्षाकर्मी पर जानलेवा हमला कर दिया। इलाज के दौरान जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भड़ाना ने दम तोड़ दिया।

क्यों सुलगी हिंसा की चिंगारी?

ग्रामीणों का आरोप है कि भड़ाना का क्रशर प्लांट चरागाह भूमि पर अतिक्रमण कर लगाया गया था और वहां अवैध खनन हो रहा था। यह प्लांट पिछले एक साल से बंद था। ग्रामीणों ने इसे दोबारा शुरू करने का कड़ा विरोध किया था और पिछले 15 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। वहीं, भड़ाना के परिजनों का तर्क है कि उनके पास अदालत से संचालन की कानूनी अनुमति थी।

आखिर क्रशर का खेल इतना विवादित क्यों है?

खनन का यह कारोबार केवल पत्थर तोड़ने तक सीमित नहीं है। इसमें पहाड़ से पत्थर निकालने की लीज, पर्यावरण मंजूरी और सबसे महत्वपूर्ण रास्ते का विवाद शामिल होता है। इस व्यापार में करोड़ों का मुनाफा है, जिसकी वजह से लीज धारक अक्सर नियमों को ताक पर रख देते हैं। धूल-धुएं और ब्लास्टिंग से प्रभावित ग्रामीण जब अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो यह विवाद अक्सर खूनी संघर्ष में बदल जाता है।

प्रशासन की मिलीभगत के गंभीर आरोप

राजस्थान में खनन माफिया का जाल काफी गहरा माना जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन, वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत के बिना अवैध खनन संभव नहीं है। आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो पिछले सात वर्षों में अरावली क्षेत्र में अवैध खनन के हजारों मामले सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद लीज की सीमा से बाहर जाकर सरकारी जमीन और चरागाहों पर कब्जा करना आम बात हो गई है।

जांच और तनाव का माहौल

फिलहाल घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात है और इलाके में तनाव बना हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो पाएगा कि भड़ाना की मौत केवल पिटाई से हुई या उन्हें गोली भी मारी गई थी, जैसा कि उनके परिजनों ने आरोप लगाया है। यह हत्या केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है जो विकास के नाम पर पर्यावरण और जनजीवन को दांव पर लगाती है।

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