कौन हैं पटना की SDM कृतिका मिश्रा? हिंदी मीडियम से UPSC टॉप कर बनीं चर्चा का केंद्र
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पटना के जेडी वीमेंस कॉलेज के बाहर हाल ही में हुए हंगामे के बाद पटना सदर की एसडीएम कृतिका मिश्रा सुर्खियों में हैं। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था संभालने के उनके सख्त रुख ने लोगों का ध्यान खींचा है। इस घटना के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर कौन हैं कृतिका मिश्रा और उनका अब तक का सफर कैसा रहा है।

कौन हैं कृतिका मिश्रा? कृतिका मिश्रा 2023 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली हैं। अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 66 हासिल की थी। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने हिंदी माध्यम का चुनाव कर यह बड़ी सफलता प्राप्त की है।

हिंदी साहित्य में है गहरी पकड़ कृतिका की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत है। उन्होंने हिंदी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है। सिविल सेवा की तैयारी के दौरान भी उन्होंने हिंदी साहित्य को अपना मुख्य विषय रखा था। आईएएस बनने से पहले उन्होंने इसी विषय में नेट-जेआरएफ (NET-JRF) भी क्वालिफाई किया था, जो उनकी विषय पर पकड़ को दर्शाता है।

कोविड काल में बुना आईएएस बनने का सपना कृतिका ने यूपीएससी की तैयारी की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान की थी। जब दुनिया घरों में बंद थी और शिक्षा का तरीका पूरी तरह बदल चुका था, तब उन्होंने प्रशासन में जाने का संकल्प लिया। घर पर रहकर ही उन्होंने कड़ी मेहनत की और पहले ही प्रयास में सफलता का परचम लहराया।

प्रशासनिक अनुभव और चुनौतियां वर्तमान में कृतिका मिश्रा पटना सदर की एसडीएम के रूप में तैनात हैं। इससे पहले वह बिहार के मधेपुरा और खगड़िया जैसे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। हाल ही में जेडी वीमेंस कॉलेज के बाहर हुए प्रदर्शन पर उन्होंने स्पष्ट कहा था कि भीड़ के कारण यातायात बाधित हो रहा था और व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी थी।

हिंदी मीडियम छात्रों के लिए बनीं प्रेरणा अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में हिंदी माध्यम के छात्रों के मन में सफलता को लेकर संशय रहता है। कृतिका मिश्रा की यह सफलता उन सभी के लिए एक मिसाल है जो अपनी मातृभाषा या हिंदी माध्यम से परीक्षा देना चाहते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि भाषा बाधा नहीं, बल्कि सही दिशा में की गई तैयारी और निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।

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