दिल्ली में प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: मेट्रो, इंटरनेट और लोगों की आवाजाही पर बड़ा आदेश
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन द्वारा की गई सख्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। रविवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था के नाम पर आम जनता के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।

शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में न लें

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शांतिपूर्ण ढंग से एकत्रित होने वाले लोगों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए। अदालत ने साफ कहा कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने की प्रक्रिया कानून के दायरे में और तय प्रक्रिया के अनुसार ही होनी चाहिए।

मेट्रो, ट्रेन और इंटरनेट पर रोक नहीं

शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि दिल्ली में मेट्रो, रेल सेवाएं और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इन सेवाओं पर पाबंदियां तभी लगाई जा सकती हैं, जब वे संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत पूरी तरह उचित हों। अधिकारियों को बैरिकेडिंग की तत्काल समीक्षा करने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि जनता को बेवजह परेशानी न हो।

न्याय तक पहुंच में बाधा नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि अदालत परिसर के बाहर लगी धारा 163 (BNSS) का बोर्ड तुरंत हटाया जाए। अदालत ने जोर दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से नहीं रोका जाना चाहिए। न्याय पाने के लिए अदालत तक पहुंच निर्बाध होनी चाहिए।

केंद्र सरकार को अवमानना का नोटिस

अदालत ने 9 अक्टूबर के अपने पिछले आदेश का कथित उल्लंघन करने के मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आड़ में जनता के अधिकारों का शोषण न हो।

हिरासत का पूरा ब्यौरा पेश करने का आदेश

अदालत ने 10 अक्टूबर को भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर गंभीर चिंता जताई है। सरकार को निर्देश दिया गया है कि हिरासत में लिए गए लोगों, उनके हालात और कानूनी आधार की विस्तृत रिपोर्ट मंगलवार, 13 अक्टूबर तक पेश की जाए। उसी दिन इस मामले की अगली सुनवाई होगी।

पृष्ठभूमि: गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कुछ छात्र संगठनों ने निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर प्रदर्शन किया था। पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को रोकने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किए थे, जिसमें ध्रुव राठी और अन्य नेताओं सहित 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था।

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