शहबाज के ट्वीट अमेरिका से ड्राफ्ट होकर आते हैं : ईरानी अधिकारी ने पाकिस्तान को दिखाया आईना
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तेहरान: ईरान और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तल्खी बढ़ती जा रही है। ईरानी संसद के आर्थिक आयोग के चेयरमैन मोहसिन जंगनेह ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को फर्जी करार देते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पाकिस्तान की कठपुतली वाली छवि पर सवाल मोहसिन जंगनेह ने दावा किया कि पाकिस्तान सरकार में बैठे लोग अपनी मर्जी से कुछ नहीं करते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शहबाज शरीफ के ट्वीट्स को अमेरिका से इजाजत मिलती है।

जंगनेह ने खुलासा किया कि जब शरीफ ने पहली बार ट्वीट किया, तो उसे स्टीव विटकॉफ ने आगे बढ़ाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वह ट्वीट सीधे अमेरिका से ड्राफ्ट होकर आया था। ईरानी अधिकारी के इस बयान ने इस्लामाबाद की विश्वसनियता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

तालिबान की तारीफ, पाकिस्तान की आलोचना जहां एक तरफ ईरान ने पाकिस्तान के रुख की कड़ी आलोचना की है, वहीं दूसरी तरफ अफगानिस्तान के तालिबान शासन की जमकर तारीफ की है। जंगनेह ने कहा कि जंग के मुश्किल दौर में अफगानिस्तान ने ईरान का पूरा समर्थन किया है।

ईरान का यह रुख यह दर्शाता है कि तेहरान अब पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा करने के बजाय तालिबान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है।

बदलते क्षेत्रीय समीकरण और ईरान-तालिबान दोस्ती भले ही ईरान ने अभी तक तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन दोनों देशों के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं। हाल ही में तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी और ईरानी राजनयिकों के बीच मॉस्को फॉर्मेट के दौरान बैठकें हुई हैं।

इन मुलाकातों का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। इस्लामाबाद के लिए यह एक संकेत है कि क्षेत्रीय राजनीति में उसकी भूमिका को तेहरान अब गंभीरता से नहीं ले रहा है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष: आठ महीने का तनाव अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से जारी टकराव ने मध्य-पूर्व की स्थिति को अस्थिर कर दिया है। पाकिस्तान ने इस बीच मध्यस्थ बनने का नाटक किया, जिसके परिणामस्वरूप दो महीने का अस्थायी सीजफायर भी हुआ।

हालांकि, इस संघर्ष-विराम के दौरान भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील इलाकों में हमले जारी रहे। मोहसिन जंगनेह के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि ईरान को पाकिस्तान की मध्यस्थता पर न केवल शक है, बल्कि वह इसे वाशिंगटन के इशारे पर चलने वाला कूटनीतिक ड्रामा मानता है।

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