चुनाव आयोग के बचाव में उतरे 124 पूर्व अफसर, कहा- बिना सबूत धांधली का शोर मचाना गलत
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दिल्ली में सियासी उबाल के बीच बड़ा घटनाक्रम चुनाव आयोग पर लग रहे वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों के बीच अब 124 पूर्व IAS और IFS अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया है। देश के नाम लिखे एक खुले खत में इन पूर्व नौकरशाहों ने चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का जोरदार बचाव किया है। अधिकारियों का कहना है कि ठोस सबूतों के बिना संवैधानिक संस्था की साख पर सवाल उठाना पूरी तरह निराधार है।

CJP का प्रदर्शन और जंतर-मंतर पर तनाव यह खत ऐसे समय में आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। आज (10 अक्टूबर) दिल्ली में हुए प्रोटेस्ट के दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए पूर्व अधिकारियों ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।

बूथ कैप्चरिंग का जमाना लद चुका है पूर्व अधिकारियों ने अपने खत में स्पष्ट किया है कि भारत की चुनावी प्रक्रिया अब अत्यंत सुरक्षित हो चुकी है। उन्होंने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव का हवाला दिया, जहां रिकॉर्ड मतदान हुआ और एक भी बूथ पर दोबारा वोटिंग की नौबत नहीं आई। उन्होंने EVM की सुरक्षा, स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी और VVPAT पर्चियों को चुनावी पारदर्शिता का बड़ा आधार बताया।

जीतें तो सिस्टम सही, हारें तो धांधली? खत में अधिकारियों ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, कोई सिस्टम तब ईमानदार नहीं हो सकता जब आप जीत जाएं और धांधली वाला तब, जब आप हार जाएं। पत्र में याद दिलाया गया कि इसी चुनाव आयोग की देखरेख में केंद्र में सत्ताधारी पार्टी कई राज्यों के चुनाव हारी और 2024 में संसदीय बहुमत भी गंवाया। अधिकारियों का तर्क है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और संस्थागत सुरक्षा कवच इसे किसी भी प्रभाव से अलग रखते हैं।

पूर्व जजों ने भी जताई थी चिंता गौरतलब है कि इससे पहले 42 पूर्व जजों ने भी चुनाव आयोग के समर्थन में इसी तरह का रुख अपनाया था। जजों ने कहा था कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार चोर कहना या बिना तथ्यों के वोट चोरी का आरोप लगाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन संस्थाओं को बदनाम करने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती।

लोकतंत्र पर जारी है खींचतान जहां एक ओर पूर्व नौकरशाह आयोग की निष्पक्षता पर मुहर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर CJP जैसे राजनीतिक दल और कार्यकर्ता इसे अघोषित इमरजेंसी करार दे रहे हैं। सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की एंट्री ने इस आंदोलन को और तेज कर दिया है, जिन्होंने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने के लिए अनशन की चेतावनी दी है।

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