दिल्ली में अघोषित इमरजेंसी : प्रदर्शन के दौरान केजरीवाल-ममता हिरासत में, राजधानी बनी छावनी
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नई दिल्ली: शनिवार, 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली प्रदर्शनों की आग में झुलसी रही। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर बुलाए गए विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि दिल्ली को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया था।

43 हजार जवान और घेराबंदी प्रशासन ने प्रदर्शन को रोकने के लिए कमर कस ली थी। दिल्ली की सीमाओं पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 23 हजार अर्धसैनिक बलों और 20 हजार दिल्ली पुलिसकर्मियों समेत कुल 43 हजार जवानों को तैनात किया गया। शहर के 57 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए और कनॉट प्लेस के बाजार भी एहतियातन बंद रखे गए।

केजरीवाल और ममता बनर्जी की गिरफ्तारी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बसों में खींच-खींचकर भरा। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हाथापाई और धक्का-मुक्की की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।

नेताओं की गिरफ्तारी और पुलिस से टकराव CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को एयरपोर्ट पर विमान के भीतर से ही हिरासत में ले लिया गया। जंतर-मंतर और गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के पास मार्च निकाल रहे वकीलों को भी हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में सीजेआई के हस्तक्षेप के बाद छोड़े जाने की सूचना मिली।

क्यों मचा है बवाल? CJP मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 में किए गए बदलावों का विरोध कर रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसमें धांधली की गई है। CJP संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने समर्थकों से अपील की है कि अगर पुलिस उन्हें रोकती है, तो वे सड़क पर ही प्रदर्शन जारी रखें।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस कार्रवाई की तुलना ब्रिटिश शासन से की है। उन्होंने कहा कि Gen-Z के युवा अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें दबाया जा रहा है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि धारा 163 (BNSS) लागू होने के कारण किसी भी अवैध जमावड़े की अनुमति नहीं दी जा सकती थी। कुछ इलाकों में हुई पत्थरबाजी को लेकर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।

फिलहाल दिल्ली के कई हिस्सों में तनाव बरकरार है और प्रशासन की पूरी नजर स्थिति पर बनी हुई है।

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