सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन पर दिल्ली में लॉकडाउन जैसे हालात, 57 मेट्रो स्टेशन और इंटरनेट सेवा बंद
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मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और विभिन्न छात्र संगठनों ने आज जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति न मिलने के बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर जुटने लगे हैं, जिससे राजधानी में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

पुलिस की कड़ी कार्रवाई और धारा 163 दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र में बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों को पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया है। प्रदर्शन को रोकने के लिए बीएसएफ और सीआरपीएफ सहित 35 हजार से अधिक सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। पुलिस ने अब तक आप, सीजेपी और विभिन्न वाम दलों के करीब 200 समर्थकों को हिरासत में लिया है।

मेट्रो और इंटरनेट पर लगा प्रतिबंध प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 57 स्टेशनों को शुक्रवार रात से ही बंद कर दिया है। ये स्टेशन स्थिति सामान्य होने तक बंद रहेंगे। साथ ही, नई दिल्ली जिले के जनपथ-कर्तव्य पथ के चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाओं को भी 24 घंटे के लिए ठप कर दिया गया है। सराय काले खां और न्यू अशोक नगर नमो भारत स्टेशनों पर भी आवाजाही सीमित कर दी गई है।

रेल यातायात पर बड़ा असर इस प्रदर्शन का असर ट्रेनों के परिचालन पर भी व्यापक रूप से पड़ा है। नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और तिलक ब्रिज स्टेशनों से चलने वाली सैकड़ों ट्रेनें निरस्त कर दी गई हैं। शुक्रवार दोपहर से शनिवार दोपहर तक राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत सहित 224 से अधिक ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। यात्रियों की भीड़ में भारी असुविधा देखी जा रही है।

प्रदर्शनकारियों के लिए डिटेंशन सेंटर तैयार दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। पुलिस ने कहा है कि जो भी समर्थक एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या दिल्ली की सीमाओं से प्रवेश करेंगे, उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया जाएगा। गिरफ्तार किए गए लोगों को दिल्ली के 35 अलग-अलग डिटेंशन सेंटरों में भेजा जाएगा। पुलिस ने बताया कि आयोजकों ने प्रदर्शन के लिए अनिवार्य समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं किया था, जिसके कारण इसे अवैध घोषित किया गया है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें आंदोलनकारियों की मांगों में सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, उनके खिलाफ आपराधिक जांच, 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को रद्द करना और जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करना शामिल है। इसके साथ ही, वे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को तुरंत रोकने की मांग भी कर रहे हैं।

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