डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के खिलाफ एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए उस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह फैसला ICC और वाशिंगटन के बीच चल रहे लंबे टकराव को एक नए स्तर पर ले गया है।
प्रतिबंधों का आधार और मकसद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन किसी भी हाल में अमेरिकी नागरिकों पर ICC के किसी भी मुकदमे को बर्दाश्त नहीं करेगा। रुबियो ने ICC को दुष्ट कोर्ट करार देते हुए चेतावनी दी कि या तो यह संस्था अपनी धमकियां बंद करे, वरना अमेरिका इसे पूरी तरह खत्म कर देगा।
प्रतिबंधों का असर: ठप हो सकती हैं सेवाएं ये प्रतिबंध पहले के मुकाबले कहीं अधिक व्यापक हैं। अब तक केवल कुछ जजों या अभियोजकों को निशाना बनाया जा रहा था, लेकिन नए प्रतिबंधों से कोर्ट की बुनियादी बैंकिंग, बीमा, सॉफ्टवेयर और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं पर रोक लग सकती है। इससे ICC का कामकाज चलाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
यूरोपीय देशों के साथ बढ़ेगा तनाव इस कदम से न केवल वाशिंगटन और ICC के बीच दूरियां बढ़ी हैं, बल्कि अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों के साथ भी तनाव गहराने की आशंका है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह अपने सहयोगियों से उम्मीद करता है कि वे ICC पर लगाम लगाने में वाशिंगटन का साथ देंगे।
संसाधन खत्म करने की रणनीति अमेरिकी प्रशासन का लक्ष्य ICC के संसाधनों को पूरी तरह से सुखाना है, ताकि उसके काम करने की क्षमता को समाप्त किया जा सके। हालांकि, विदेश विभाग का कहना है कि ट्रेजरी विभाग कुछ गतिविधियों के लिए विशेष लाइसेंस जारी कर सकता है, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ मामलों में अस्थायी छूट का विकल्प खुला रखा गया है।
समाधान की उम्मीदें हुईं नाकाम ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उन्होंने यह कार्रवाई काफी पहले इसलिए टाल दी थी ताकि ICC और रोम स्टेच्यूट्स के सदस्य देश आपस में किसी समाधान पर पहुंच सकें। लेकिन जब बातचीत नाकाम रही, तो अमेरिका ने अपने हितों की रक्षा के लिए यह कठोर निर्णय लिया।
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब ICC की पूर्व जज नवी पिल्लै को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है, जबकि वाशिंगटन अपने रुख पर पूरी तरह अडिग नजर आ रहा है।
Today, the Trump Administration is sanctioning the ICC.
— Secretary Marco Rubio (@SecRubio) October 9, 2026
This action should encourage our Allies within the Court to work for solutions to end this threat to U.S. sovereignty forever. pic.twitter.com/D86dCqLUaZ
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