अब शायद कभी घर नहीं लौटेंगे ... 322 दिनों की खौफनाक जंग के बाद वतन लौटे USS अब्राहम लिंकन के जांबाज
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सैन डिएगो: करीब 11 महीने तक मौत के साये में समंदर पर राज करने के बाद अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन वापस अपने बेस पर लौट आया है। 322 दिनों की लंबी तैनाती के बाद जब यह युद्धपोत सैन डिएगो पहुंचा, तो वहां का नजारा बेहद भावुक था। 10 महीने से अधिक समय तक ईरान मिशन पर रहे इन जांबाजों का स्वागत अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने खुद किया।

पहली बार बच्चों को गले लगाने का सुकून

जहाज के किनारे लगते ही हजारों जवान अपने रोते-बिलखते परिवारों से मिले। इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि जहाज पर मौजूद 122 ऐसे जवान थे, जिन्होंने अपनी तैनाती के दौरान जन्मे बच्चों का चेहरा पहली बार देखा। 20 साल के नाविक एबेल रामिरेज ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, एक वक्त ऐसा भी आया था जब मुझे लगा कि मैं शायद अब कभी वापस नहीं लौट पाऊंगा, लेकिन आज यह अहसास अद्भुत है।

राशन की किल्लत और मानसिक तनाव

हालांकि, इस मिशन की चमक-धमक के पीछे अंधेरे पहलू भी रहे। महीनों तक समंदर में रहने के कारण जवानों को राशन की कमी और मानसिक तनाव से जूझना पड़ा। नौसेना ने स्वीकार किया कि लगातार कॉम्बैट ऑपरेशंस के कारण रसद पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। चिंताजनक बात यह रही कि इस तैनाती के दौरान 8 नाविकों ने खुदकुशी की कोशिश की, जो लंबे समय तक अकेलेपन और तनाव के गंभीर असर को दर्शाता है।

दुश्मन के होश उड़ाने वाले आंकड़े

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जहाज के क्रू को प्रेसिडेंशियल यूनिट साइटेशन से सम्मानित किया। आंकड़ों के अनुसार, इस ग्रुप ने मिशन के दौरान 3,693 लड़ाकू उड़ानें भरीं, 450 टोमाहॉक मिसाइलें दागीं और 77 अटैक ड्रोन को मार गिराया। इसके अलावा, 64 ईरानी युद्धपोतों को डुबोने और 21 एंटी-शिप मिसाइलों को नष्ट करने का दावा भी किया गया है।

समंदर में तैरता शहर

पिछले साल नवंबर में सैन डिएगो से निकले इस जहाज ने ओमान की खाड़ी से लेकर फारस की खाड़ी तक मोर्चा संभाला। जहाज के कैप्टन डेनियल कीलर ने इसे समंदर में तैरता शहर बताया, जहां रोजमर्रा की मुश्किलें आती रहती हैं। 322 दिनों तक लगातार चला यह मिशन अमेरिकी नौसेना के इतिहास में सबसे लंबे मिशनों में से एक है, जिसने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में अमेरिका की युद्धक क्षमता को प्रदर्शित किया है।

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