नोबेल न मिलने पर ट्रंप का बवाल : आईसीसी पर गिराई प्रतिबंधों की गाज, ठप किया दाना-पानी
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क्या है मामला? 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा होते ही वाशिंगटन में खलबली मच गई। भारतीय मूल की पूर्व न्यायाधीश नवी पिल्लई को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए हैं। ट्रंप ने न केवल सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी, बल्कि अपना सारा गुस्सा इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर निकाल दिया है।

ट्रंप की हठ और नोबेल का मोह डोनाल्ड ट्रंप का शांति नोबेल पाने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है। सत्ता में आने के बाद से ही ट्रंप खुद को वैश्विक शांति दूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके दावों के बावजूद दुनिया उनके ईरान के साथ तनावपूर्ण संबंधों और वॉर क्राइम के आरोपों को देख रही है। नोबेल न मिलने पर ट्रंप का व्यवहार किसी जिद्दी बच्चे जैसा हो गया है, जो अपनी हार को स्वीकार करने के बजाय संस्थाओं को ही निशाना बना रहा है।

आईसीसी पर आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ऐलान किया है कि अमेरिका अब आईसीसी के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगा रहा है। रुबियो ने अदालत को दुष्ट करार देते हुए कहा कि अमेरिका इसके सभी वित्तीय संसाधन काट देगा। नए आदेशों के तहत केवल जजों पर ही प्रतिबंध नहीं हैं, बल्कि उन कंपनियों पर भी भारी जुर्माना लगाया जाएगा जो कोर्ट को बैंकिंग, इंश्योरेंस या सॉफ्टवेयर जैसी सेवाएं दे रही हैं। मकसद साफ है—अदालत को पूरी तरह अपाहिज बना देना।

या तो बदलो या खत्म हो जाओ ट्रंप प्रशासन ने दो टूक चेतावनी दी है कि वे किसी भी अमेरिकी या सहयोगी देश के नागरिक पर आईसीसी द्वारा मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं देंगे। विदेश मंत्री ने धमकी भरे लहजे में कहा कि या तो अदालत अपनी हरकतों से बाज आए, वरना अमेरिका इसे जड़ से खत्म कर देगा। इस कार्रवाई का सीधा असर कोर्ट के दैनिक कामकाज पर पड़ रहा है, जिसे कई विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय कानून पर हमला करार दिया है।

आईसीसी का पलटवार प्रतिबंधों के जवाब में आईसीसी ने इसे कानून के शासन की नींव पर हमला बताया है। अदालत ने कहा कि वह इन धमकियों से डरने वाली नहीं है। आईसीसी की अध्यक्ष तोमोको अकाने ने अपने 125 सदस्य देशों से एकजुट होने का आह्वान किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने जनादेश का पालन सबूतों और निष्पक्षता के आधार पर करना जारी रखेगी।

नोबेल कमेटी का ट्रंप को करारा जवाब नवी पिल्लई को नोबेल देने के पीछे कमेटी का तर्क ट्रंप के लिए एक कड़ा संदेश है। कमेटी ने कहा कि आज के दौर में जब ताकतवर नेता खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं और जजों को धमका रहे हैं, ऐसे में पिल्लई का चयन यह याद दिलाता है कि अमन-चैन तभी संभव है जब युद्ध अपराधियों को सजा मिले। यह पुरस्कार ट्रंप के उन दावों पर तमाचा है, जो अंतरराष्ट्रीय अदालतों को अपनी मर्जी से चलाने की कोशिश कर रहे हैं।

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