नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर लगाम लगाने का फैसला किया है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी मतदाता मनमाने तरीके से नाम हटाने के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा। नए नियमों के अनुसार:
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार फिलहाल विवादों के केंद्र में हैं। उन पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाने का आरोप है। विपक्ष का तर्क है कि इससे गरीबों, प्रवासियों और पिछड़े वर्गों को निशाना बनाया गया है।
साथ ही, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई है, जिससे आयोग के भीतर आंतरिक कलह की खबरें भी सामने आई हैं।
विपक्षी INDIA गठबंधन ने मतदाता पंजीकरण के लिए उपयोग होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव को वोट चोरी करार दिया है। दिलचस्प बात यह है कि 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को अपनी मंजूरी नहीं दी थी। फिलहाल मामला सर्वोच्च न्यायालय में है, जहां सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा गया है।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कल होने वाले प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने प्रेस रिलीज जारी कर जुलाई में हुए पिछले प्रदर्शन का हवाला दिया, जिसमें प्रदर्शनकारियों के एक महीने तक डटे रहने से 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस का आरोप है कि उस प्रदर्शन में आपराधिक पृष्ठभूमि के 2,000 से अधिक लोग शामिल थे।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि आयुक्तों के बीच मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने बिहार जैसे राज्यों में विशेष पंजीकरण अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है ताकि छूटे हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा जोड़ा जा सके। भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराने की राजनीतिक साजिश बताया है।
इधर, विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर वोट चोरी की शिकायत की है। राष्ट्रपति ने उनसे इस मामले में ठोस सबूत मांगे हैं, जिस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि वे सबूत जुटा रहे हैं।
The Election Commission of India has capped the number of Form 7 applications that an individual elector can file during the electoral-roll revision process.
— ANI (@ANI) October 9, 2026
(i) Maximum number of Form 7 applications during the entire period of claims and objections by an individual elector: 10… pic.twitter.com/cMTy0yV6Cj
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