दिल्ली रणभूमि: 57 मेट्रो स्टेशन सील, 38 ट्रेनें रद्द; CJP विरोध-प्रदर्शन से पहले राजधानी में महा-घेराबंदी
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नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर राजधानी दिल्ली पूरी तरह से छावनी में तब्दील हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाए गए इस आंदोलन को रोकने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त सुरक्षा घेराबंदी की है।

57 मेट्रो स्टेशन बंद, आवाजाही पर लगा ब्रेक सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से 57 प्रमुख स्टेशनों पर प्रवेश और निकास पूरी तरह बंद कर दिया है। ये पाबंदी अगले आदेश तक जारी रहेगी। प्रभावित स्टेशनों में राजीव चौक, कश्मीरी गेट, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, नई दिल्ली और आईटीओ जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। राहत की बात यह है कि नई दिल्ली स्टेशन को छोड़कर शेष स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा चालू रहेगी।

ट्रेनें रद्द, परीक्षाओं पर संकट विरोध-प्रदर्शन की आंच ट्रेनों और शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ी है। 38 ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है या उनके रूट में बदलाव किया गया है। शनिवार को होने वाली कई परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर क्लास चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा का अभूतपूर्व जमावड़ा दिल्ली पुलिस के साथ 26,000 अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों (CAPF) को तैनात किया गया है। 2020 के दंगों के बाद राजधानी में यह सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी तैनाती है। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले सभी रास्ते बैरिकेडिंग कर सील कर दिए गए हैं। नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है और लाउडस्पीकर के जरिए सार्वजनिक जमावड़े पर सख्त रोक लगाई गई है।

मीडिया और आम जनता पर पाबंदी सुरक्षा के नाम पर मीडियाकर्मियों को भी जंतर-मंतर से दूर रहने को कहा गया है। उन्हें सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। पूरे नई दिल्ली क्षेत्र में कड़ा पहरा है और आम नागरिकों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी मामला 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने प्रशासन को फटकार लगाई। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि मेट्रो और रेल सेवाओं को पूरी तरह ठप न किया जाए। बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि उचित नियमन के साथ सेवाओं का संचालन जारी रखा जाए ताकि आम जनता को भारी असुविधा न हो।

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