दूर से करें कवरेज – पत्रकारों को हिरासत में लेने के आरोपों पर घिरी दिल्ली पुलिस
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दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस पर पत्रकारों को हाउस अरेस्ट करने, रेल यात्राओं के दौरान रोकने और प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के गंभीर आरोप लगे हैं। इस विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों को प्रदर्शन से दूरी बनाए रखने की नसीहत दी है।

पुलिस का तर्क: पत्रकारिता को प्रदर्शन में न बदलें

दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त डीसीपी (नई दिल्ली) मनजीत श्योराण ने कहा कि पत्रकारों को प्रदर्शनकारियों से सुरक्षित दूरी पर रहकर अपनी रिपोर्टिंग करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पत्रकार बनकर आते हैं और बाद में खुद प्रदर्शनकारी बन जाते हैं। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि मीडिया कर्मियों की मौजूदगी से उनके काम में बाधा आती है। सोशल मीडिया पर पुलिस ने सख्त लहजे में कहा कि पत्रकारिता की भूमिका है, इसे प्रदर्शन का जरिया न बनाएं।

प्रदर्शनकारियों के दमन के गंभीर आरोप

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस पर तानाशाही का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि लोगों को ट्रेनों से उतारा जा रहा है और घरों से जबरन उठाकर अज्ञात स्थानों पर ले जाया जा रहा है। नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस एक स्वतंत्र एजेंसी के बजाय एक राजनीतिक मशीनरी की तरह काम कर रही है, जो लोकतंत्र पर सीधा हमला है।

महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार: मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा

3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस पर यौन उत्पीड़न और मारपीट का आरोप लगाया था। इस मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने इसे जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। कमला मार्केट स्थित क्राइम ब्रांच की टीम अब इन शिकायतों की गहन जांच करेगी। इन महिलाओं की मेडिकल जांच भी कराई गई है।

NHRC ने लिया संज्ञान, दिल्ली पुलिस को नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है। उनसे दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।

अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्राइम ब्रांच की जांच और NHRC को दी जाने वाली रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं। इन आरोपों ने एक बार फिर दिल्ली में प्रेस की स्वतंत्रता और पुलिस के कामकाज के बीच के संतुलन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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