वोट चोरी के आरोपों पर गरमाई सियासत: राहुल गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिलेगा INDIA ब्लॉक, संसद से सड़क तक मचा घमासान
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देश की राजनीति में वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उपजा विवाद गहराता जा रहा है। विपक्षी गठबंधन इंडिया (INDIA) ने इसे लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार रात 8 बजे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 10 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग संसद के सेंट्रल हॉल में एकत्र हुए विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सांसदों ने हाथ में ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो लिखे बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार न तो सांसदों से मिल रहे हैं और न ही चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बरत रहे हैं। राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का काम जनता के प्रतिनिधियों की बात सुनना है, उन्हें सांसदों से मिलना ही होगा।

नेहरू के भाषण से भरी हुंकार विपक्षी सांसदों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने 14 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा दिए गए ऐतिहासिक भाषण का जिक्र किया। नेहरू के शब्दों— यह सितारा कभी अस्त न हो —को दोहराते हुए राहुल ने कहा कि लोकतंत्र में उम्मीद की लौ को बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने गुजरात, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों पर भी आश्चर्य जताते हुए कहा कि इनके पीछे की सच्चाई और अनियमितताओं के सबूतों ने उन्हें हिलाकर रख दिया है।

300 सांसद चाहते हैं राष्ट्रपति से बात कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने दावा किया कि इंडिया गठबंधन के करीब 300 सांसद राष्ट्रपति से अपनी बात कहना चाहते हैं। उनका कहना है कि हर सांसद अपने क्षेत्र में मतदाता सूची में हुई धांधली की रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपना चाहता है। हालांकि, राष्ट्रपति भवन की ओर से फिलहाल केवल 10 नेताओं को ही मिलने की अनुमति मिली है, जिसे लेकर विपक्ष में असंतोष है।

विजय चौक पर बैठा विपक्ष राष्ट्रपति भवन की ओर जाने वाले रायसीना हिल्स इलाके को पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया है। प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रपति भवन जाने के दौरान, बाकी विपक्षी नेता और सांसद विजय चौक पर धरने पर बैठ गए हैं। विपक्षी सांसदों का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सत्याग्रह है जो देशभर में फैल चुका है।

अघोषित आपातकाल का आरोप समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने प्रदर्शनों पर लगाई जा रही पाबंदियों पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यदि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं है, तो यह अघोषित आपातकाल और तानाशाही का दौर है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष मिलकर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को खत्म कर रहे हैं, जबकि आयोग और सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अब सबकी निगाहें शुक्रवार रात की उस मुलाकात पर टिकी हैं, जहाँ विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में सुधार की मांग रखेगा।

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