नाना पाटेकर पंचतत्त्वों में विलीन, मौत के मामले में गोवा पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मृत्यु का केस
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हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 8 अक्टूबर को गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर उनका निधन हो गया। 75 वर्षीय अभिनेता को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुणे के दोणजे गांव स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान फिल्म जगत की कई हस्तियां और उनके प्रशंसक नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।

गोवा पुलिस की जांच: अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज

नाना पाटेकर के निधन के बाद गोवा पुलिस ने इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज किया है। पणजी पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मृत्यु (Unnatural Death) का मामला दर्ज किया है।

पुलिस को सुबह 8:07 पर मणिपाल अस्पताल से सूचना मिली थी कि अभिनेता को मृत अवस्था में लाया गया है। एहतियात के तौर पर पुलिस ने घटनास्थल और अस्पताल से जुड़े तमाम तथ्यों को जुटाना शुरू कर दिया है। पीएसआई नितिन नाइक इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।

पोस्टमॉर्टम और जांच की दिशा

अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, शुरुआती तौर पर मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

अस्पष्टता दूर करने और मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए पुलिस संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज करेगी। गौर करने वाली बात यह है कि अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज होना किसी साजिश का संकेत नहीं है, बल्कि यह एक मानक कानूनी प्रक्रिया है जिसका पालन ऐसी परिस्थितियों में किया जाता है।

पिता के अधूरे सपनों को पूरा करेंगे मल्हार

नाना पाटेकर न केवल एक मंझे हुए कलाकार थे, बल्कि नाम फाउंडेशन के जरिए किसानों और सूखे से जूझ रहे इलाकों के लिए एक मसीहा भी थे। अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने संकल्प लिया कि वे अपने पिता के सामाजिक कार्यों को रुकने नहीं देंगे।

मल्हार ने कहा, पिता के समाजसेवा के संकल्प अब महाराष्ट्र से बाहर पूरे देश तक ले जाए जाएंगे। मैं उन्हें अपने से दूर नहीं मानता, वे हमेशा मेरे साथ रहेंगे और उनके दिखाए रास्ते पर ही नाम फाउंडेशन का काम आगे बढ़ेगा।

क्या समय पर CPR से बच सकती थी जान?

नाना पाटेकर की मौत के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थितियों में गोल्डन ऑवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। सीपीआर (CPR) समय पर मिलने से पीड़ित के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। छाती को जोर से और तेजी से दबाने की यह तकनीक हृदय की धड़कन और रक्त प्रवाह को बहाल करने में रामबाण साबित हो सकती है। विशेषज्ञ आम लोगों को भी सीपीआर का प्रशिक्षण लेने की सलाह दे रहे हैं ताकि आपात स्थिति में जीवन बचाया जा सके।

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