10 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन को मिली किसान संगठनों की ताकत, चुनावी सुधार के लिए आर-पार की लड़ाई
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दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा बुलाई गई इस रैली को अब भारतीय किसान यूनियन (BKU) का खुला समर्थन मिल गया है। किसान नेता राकेश टिकैत और युवा मोर्चा के अध्यक्ष अनुज सिंह ने इस आंदोलन को देश के युवाओं और नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई करार दिया है।

युवा किसानों से जंतर-मंतर पहुँचने की अपील भारतीय किसान यूनियन युवा मोर्चा के अध्यक्ष अनुज सिंह ने एक वीडियो जारी कर देशभर के युवाओं से जंतर-मंतर पहुँचने का आह्वान किया है। अनुज सिंह का कहना है कि यह लड़ाई केवल किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान द्वारा मिले वोट के अधिकार को बचाने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में चुनाव आयोग का कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका सवालों के घेरे में है।

CJP और छात्र संगठनों का साझा मोर्चा 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को ताकत देने के लिए CJP के साथ कई प्रमुख छात्र संगठन भी एकजुट हो गए हैं। इसमें AISA, AISF, SFI और आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई (ASAP) शामिल हैं। इन संगठनों का साफ कहना है कि चुनावी व्यवस्था में व्यापक सुधार के बिना लोकतंत्र को बचाना मुश्किल है। इन छात्र संगठनों ने विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन द्वारा हाल ही में किए गए विरोध मार्च का भी समर्थन किया है।

इस्तीफे से आगे की है मांग CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगा। दास ने कहा, अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे भी देते हैं, तब भी हमारा आंदोलन जारी रहेगा। हमारी मांग चुनावी प्रक्रिया में आमूल-चूल बदलाव और स्वतंत्र चयन प्रक्रिया लागू करने की है।

प्रदर्शन की प्रमुख मांगें:

अनुमति नहीं, सूचना देकर करेंगे प्रदर्शन प्रदर्शन की अनुमति के सवाल पर आयोजकों ने बड़ा रुख अपनाया है। सौरव दास का कहना है कि वे अनुमति शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहते, क्योंकि यह नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने संसद मार्ग थाने को प्रदर्शन की औपचारिक सूचना दे दी है। आयोजकों ने भरोसा दिलाया है कि वे दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग करेंगे, लेकिन वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

NEET पेपर लीक मामले में सक्रिय रहने के बाद, अब CJP चुनाव आयोग के खिलाफ इस अभियान को एक लंबी लड़ाई के रूप में देख रहा है। 10 अक्टूबर का जंतर-मंतर प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि चुनावी सुधारों की मांग अब और अधिक मुखर होने वाली है।

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