7 अक्टूबर 2026 को नरेंद्र मोदी ने एक निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे कर लिए हैं। साढ़े 12 साल गुजरात के मुख्यमंत्री और इतने ही समय प्रधानमंत्री के तौर पर बिताने वाले मोदी ने भारतीय राजनीति और शासन के ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। यह सिर्फ सत्ता का लंबा सफर नहीं, बल्कि ऐसे सिद्धांतों का निर्माण है जिन्हें आने वाली सरकारें भी अनदेखा नहीं कर सकेंगी।
इन 25 वर्षों के सफर में मोदी द्वारा किए गए 6 प्रमुख बदलाव निम्नलिखित हैं:
पारंपरिक राजनीति में योजनाओं का अधूरा रहना आम था, लेकिन मोदी मॉडल डिलीवरी पर केंद्रित रहा। चाहे गुजरात में जल प्रबंधन हो, 59 करोड़ जन-धन खाते खोलना हो, अनुच्छेद 370 को हटाना हो या राम मंदिर का निर्माण—हर काम को तार्किक अंत तक पहुंचाया गया। योजनाओं को बीच में छोड़ने की आदत को उन्होंने पूरी तरह खत्म कर दिया है।
भारत अब वैश्विक शक्तियों के पीछे चलने के बजाय अपनी क्षमता पर भरोसा कर रहा है। निजी अंतरिक्ष क्षेत्र, डिजिटल पेमेंट में यूपीआई की क्रांति और परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी इसके बड़े प्रमाण हैं। संकोच छोड़कर खुद पहल करने की नीति ने भारत की वैश्विक पहचान को एक आक्रामक और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।
कोरोना काल में 220 करोड़ से अधिक टीकाकरण का लक्ष्य हो या रेलवे, एयरपोर्ट और सेमीकंडक्टर निर्माण में वैश्विक मानकों का पालन—मोदी ने देश की महत्वाकांक्षा को बदल दिया है। आज भारत किसी भी क्षेत्र में औसत या सेकंड हैंड तकनीक से समझौता करने को तैयार नहीं है।
मोदी युग ने चुनावी विमर्श को बदला है। अब सिर्फ जाति या पहचान के आधार पर चुनाव जीतना मुश्किल है। आज हर दल को गारंटी और ठोस काम का वादा करना पड़ता है। साथ ही, देश की सनातन विरासत और संस्कृति पर गर्व की भावना ने जनता के भीतर आत्मविश्वास की एक नई लहर पैदा की है।
सरकार ने घर, शौचालय, गैस और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों तक सीधे पहुंच सुनिश्चित की है। आंकड़ों के अनुसार, करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। लखपति दीदी जैसी पहल ने महिलाओं को मात्र लाभार्थी नहीं, बल्कि एक आर्थिक शक्ति के रूप में खड़ा किया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में भारत की नीति अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि दृढ़ हो गई है। सर्जिकल स्ट्राइक और सीमाओं पर कड़े फैसलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए पहले जैसा हिचकिचाएगा नहीं।
निष्कर्ष: सवाल यह नहीं कि मोदी ने कितने साल सत्ता संभाली, बल्कि यह है कि क्या ये बदलाव भारत के स्थायी मानक बन पाएंगे? यदि आने वाली सरकारें भी इन्हीं लक्ष्यों को अपनाती हैं, तो मोदी का यह 25 साल का कार्यकाल भारतीय राजनीति और शासन के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।
“To me, the highest expression of democracy is when the person at the very bottom can make their voice reach the government.” - Narendra Modi
— Modi Archive (@modiarchive) October 7, 2026
In 2001 @narendramodi took oath as the Chief Minister of Gujarat, and with him he brought a blueprint born not in administrative… pic.twitter.com/akHpoWU5hT
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