प्लेटफॉर्म पर बेसुध गिरे पिता के पास बिलखता रहा मासूम, तमाशा देखती भीड़ के बीच इंसानियत ने दिखाई राह
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रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म। चारों तरफ यात्रियों की भीड़ और अपनी मंजिल पर पहुँचने की आपाधापी। इसी शोर-शराबे के बीच एक ऐसी घटना घटी, जिसने दिल को झकझोर कर रख दिया। भूख और कमजोरी से जूझ रहा एक गरीब पिता अचानक प्लेटफॉर्म पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा।

पिता के पास फूट-फूटकर रोता रहा बच्चा पिता को बेसुध पड़ा देख, उसके साथ मौजूद ढाई साल का मासूम बच्चा सहम गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि पिता को क्या हो गया है। वह पिता के पास ही लेटकर बिलखने लगा और मदद के लिए कभी इधर तो कभी उधर देखता रहा। उसकी आंखों में डर और चेहरे पर भूख साफ झलक रही थी।

तमाशबीनों ने बनाया वीडियो, किसी ने नहीं बढ़ाया हाथ दिल दहला देने वाली बात यह थी कि वहां मौजूद भीड़ में से कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया। लोग खड़े होकर इस पूरी घटना का मोबाइल में वीडियो बनाने में व्यस्त थे। किसी ने उस बच्चे की चीख नहीं सुनी, तो किसी ने पिता की गिरती सांसों की परवाह नहीं की।

एक फरिश्ता बनकर सामने आया आम नागरिक भीड़ के बीच एक व्यक्ति ने इस परिवार की दयनीय स्थिति देखी और तुरंत मदद के लिए कदम बढ़ाए। उसने न केवल आरपीएफ (RPF) को मौके पर बुलाया, बल्कि खुद भी मोर्चा संभाला। अधिकारियों की मौजूदगी में पिता को होश में लाया गया। होश में आते ही पिता ने सबसे पहले अपने बच्चे को सीने से लगा लिया।

भूख पर भारी पड़ी इंसानियत मददगार शख्स ने पिता और बच्चे के लिए तुरंत भोजन और कंबल का इंतजाम किया। खुले प्लेटफॉर्म पर ठिठुर रहे उस परिवार को गर्म खाना और कंबल मिलना किसी बड़ी राहत से कम नहीं था। पिता की कमजोरी और बच्चे की भूख को उस वक्त मानवीय संवेदनाओं का सहारा मिला।

क्या हमारा पहला काम सिर्फ वीडियो बनाना है? इस घटना ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या किसी की जिंदगी खतरे में हो, तो हमारा पहला कर्तव्य कैमरा निकालना होना चाहिए? उस भीड़ में बहुत से लोग थे, लेकिन फर्क उस शख्स ने पैदा किया जिसने तमाशा देखने के बजाय इंसानियत निभाने का विकल्प चुना।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब भूख ने किसी को सरेआम बेसुध कर दिया हो। ऐसी तस्वीरें अक्सर सामने आती रहती हैं, जो समाज की कड़वी सच्चाई बयां करती हैं। एक वक्त का खाना शायद उनकी सारी परेशानियां खत्म न कर सके, लेकिन उस कठिन घड़ी में मिली मदद ने साबित कर दिया कि भीड़ में भी इंसानियत अभी जिंदा है।

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