सागर: उपेक्षा की गंदगी को देख पीछे नहीं हटे रामजी, दोस्तों संग मिलकर मंदिर परिसर का कायाकल्प किया
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सागर। हमारे आसपास कई सार्वजनिक स्थान ऐसे होते हैं, जहां गंदगी और अव्यवस्था लंबे समय से बनी रहती है। लोग शिकायत तो करते हैं, लेकिन उसे सुधारने की पहल कम ही लोग करते हैं। सागर से एक ऐसी ही प्रेरक तस्वीर सामने आई है, जहां तीन युवकों ने सरकारी तंत्र के भरोसे बैठने के बजाय खुद जिम्मेदारी उठाई और एक मंदिर परिसर की तस्वीर बदल दी।

पेयजल सुविधा बनी थी मुसीबत मामला शहर के एक मंदिर परिसर का है, जहां स्थापित पेयजल सुविधा लंबे समय से उपेक्षा का शिकार थी। नल के आसपास भारी गंदगी, फिसलन वाली काई और चिकनाई जमी हुई थी। यह स्थिति न केवल श्रद्धालुओं के लिए असुविधाजनक थी, बल्कि किसी बड़े हादसे या फिसलन का कारण भी बन सकती थी।

शिकायत नहीं, श्रमदान का रास्ता चुना रामजी लोधी नामक नागरिक जब वहां पहुंचे और स्थिति देखी, तो उन्होंने इसे नजरअंदाज करने के बजाय सफाई का फैसला किया। उन्होंने तुरंत अपने दो दोस्तों को साथ लिया। डिटर्जेंट, ब्रश और झाड़ू लेकर तीनों घंटों तक सफाई में जुटे रहे। उन्होंने न केवल ऊपर की धूल साफ की, बल्कि रगड़-रगड़कर जमी हुई पुरानी काई और चिकनाई को भी दूर किया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई पहल इस पूरी सफाई प्रक्रिया का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सफाई से पहले और बाद का अंतर स्पष्ट दिख रहा है। लोग रामजी और उनके साथियों की इस निस्वार्थ सेवा की जमकर सराहना कर रहे हैं। इसे नागरिकों की भागीदारी का एक सशक्त उदाहरण माना जा रहा है।

बदलाव के लिए किसी आदेश की जरूरत नहीं इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि इसके लिए किसी ने कोई प्रशासनिक निर्देश नहीं दिया था। यह पूरी तरह से एक जागरूक नागरिक का व्यक्तिगत प्रयास था। रामजी लोधी ने साबित कर दिया कि यदि नागरिक ठान लें, तो सार्वजनिक स्थानों के रखरखाव के लिए किसी सरकारी अभियान का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारे शहर और गांव के सार्वजनिक स्थान भी हमारे अपने घर का हिस्सा हैं। मंदिर, पार्क या अन्य पेयजल स्थल केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं हैं। यदि हर व्यक्ति अपने हिस्से की जिम्मेदारी समझे, तो सामुदायिक स्तर पर बड़े बदलाव संभव हैं। रामजी और उनके दोस्तों का यह छोटा सा प्रयास समाज के लिए प्रेरणा का एक बड़ा माध्यम बन गया है।

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