चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पश्चिम बंगाल की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया में पोर्टल की कमियों को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस आक्रामक हो गई है। पार्टी का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया बड़े पैमाने पर हेरफेर और धांधली का हिस्सा थी।
पोर्टल में खामियां या साजिश? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि बंगाल में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल के जजों ने ईसी के डिजिटल पोर्टल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस पोर्टल के कारण जज न तो नोटिस भेज पा रहे थे, न ही वर्चुअल सुनवाई कर पा रहे थे। यहां तक कि हटाए गए वोटरों के नाम वापस जोड़ने के निर्देश देने के बावजूद सिस्टम उन्हें अनुमति नहीं दे रहा था।
इलेक्शन ओमिशन ऑफ इंडिया जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग को इलेक्शन ओमिशन ऑफ इंडिया करार दिया। उन्होंने कहा कि पीएम-एचएम (नरेंद्र मोदी और अमित शाह) की रणनीति किसी भी कीमत पर बंगाल चुनाव जीतने की थी। रमेश ने दावा किया कि CEC ज्ञानेश कुमार की देखरेख में इसे अंजाम दिया गया, जो पूरी तरह से सत्ता के इशारे पर काम कर रहे थे।
कठपुतली नचाने वालों की खैर नहीं अपनी तीखी टिप्पणी में रमेश ने कहा, कठपुतली तो जाएगी ही, लेकिन जो दो लोग इस कठपुतली को नचा रहे हैं, उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि अब उनकी असलियत जनता के सामने आ चुकी है और हिसाब-किताब का समय दूर नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी सांसद CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की योजना बना रहे हैं।
27 लाख नाम हटने से बढ़ा बवाल यह विवाद तब और गहरा गया जब सुप्रीम कोर्ट में यह बात सामने आई कि राज्य की वोटर लिस्ट से 27 लाख से अधिक वोटरों के नाम हटा दिए गए थे। इसके बाद नाम बहाली के लिए 22 लाख से ज्यादा अपीलें आईं। इन तकनीकी खामियों और चुनावी धांधली के आरोपों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जो पहले से ही अपने भीतर के मतभेदों के कारण जांच के दायरे में है।
More skeletons are tumbling out of the Election Omission of India’s closet.
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 6, 2026
Clearly the PM-HM strategy was to somehow capture and win the West Bengal Assembly elections at any cost. It was a text book case of mass manipulation and rigging which was overseen by the CEC. The… pic.twitter.com/aLV2YvYDQ7
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