एमपी का चीता प्रोजेक्ट अब बुंदेलखंड में: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बना नया ठिकाना
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भोपाल। मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करने जा रहा है। कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर के बाद अब बुंदेलखंड का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों का तीसरा नया आवास बनने जा रहा है।

7 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कूनो से लाए गए दो चीतों (नर थोलो और मादा CCB-3 ) को इस टाइगर रिजर्व के खुले जंगल में विमुक्त करेंगे।

439 हेक्टेयर में तैयार हाई-टेक आवास

चीतों के सुरक्षित स्थानांतरण और उनके अनुकूलन के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में व्यापक तैयारी की गई है। लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष बोमा (बाड़े) और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। वन विभाग की टीम इन चीतों की स्वास्थ्य जांच, सुरक्षा और नियमित निगरानी के लिए विशेष रूप से तैनात रहेगी।

प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश का सबसे विशाल टाइगर रिजर्व है। सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला यह क्षेत्र करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर के दायरे में आता है। 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद, यह बाघ, तेंदुआ, भालू और दुर्लभ भारतीय गिद्धों के संरक्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

देश में चीतों की संख्या पहुंची 60

हाल ही में कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मे पांच शावकों के आगमन के बाद, देश में चीतों की कुल संख्या 60 हो गई है। इनमें से 41 चीते भारत की ही धरती पर जन्मे हैं। गांधीसागर अभयारण्य में पहले से ही तीन चीते (प्रभास, पावक और धीरा) मौजूद हैं, और अब दुर्गावती अभयारण्य में दो नए सदस्यों के जुड़ने से चीतों का दायरा और अधिक विस्तृत हो जाएगा।

बुंदेलखंड की बदली तस्वीर: बढ़ेगा पर्यटन और रोजगार

विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड के पर्यटन क्षेत्र में भारी उछाल आएगा। वन्यजीव प्रेमियों की बढ़ती संख्या से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा।

स्थानीय स्तर पर होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन सेवाओं और गाइडों की मांग बढ़ेगी। इसके अलावा, स्थानीय हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को भी नए ग्राहक मिलेंगे, जिससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

यह विस्तार न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट के साथ-साथ चीता स्टेट के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करने की एक बड़ी पहल भी है।

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