मुझे भारत में ही दफनाया जाए : वह भारतीय यहूदी जनरल, जिसने पाकिस्तान की कमर तोड़ बांग्लादेश को दिलाई आजादी
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नई दिल्ली: लेफ्टिनेंट जनरल जैक फर्ज राफेल जैकब की कहानी केवल एक सैनिक की वीरता की गाथा नहीं, बल्कि भारत की समावेशी संस्कृति और कूटनीतिक जीत का एक बेमिसाल अध्याय है। कोलकाता के एक यहूदी परिवार में जन्मे जैकब ने न केवल 1971 के युद्ध की दिशा बदली, बल्कि अपने अंतिम समय में भारत के प्रति अटूट प्रेम का प्रमाण भी दिया।

रणनीति का मास्टरमाइंड फ्रांसीसी रणनीतिकार कैथरीन पेरेज-शकदम ने जनरल जैकब को भारत के महानतम सैन्य रणनीतिकारों में से एक बताया है। 1971 के युद्ध के दौरान, जब पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना अत्याचार कर रही थी, जैकब ईस्टर्न कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ थे। उन्होंने पारंपरिक धीमी लड़ाई के बजाय तेजी से आगे बढ़ने (bypass and advance) की रणनीति अपनाई, जिससे दुश्मन संभलने से पहले ही घुटनों पर आ गया।

90 हजार सैनिकों का आत्मसमर्पण जैकब की रणनीतिक चतुराई का ही नतीजा था कि 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तान की ईस्टर्न कमांड को बिना शर्त आत्मसमर्पण करना पड़ा। करीब 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने हथियार डाले और दुनिया के नक्शे पर एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ।

भारत मेरी मातृभूमि, यहीं दफनाया जाए इजरायल के पूर्व राजदूत डैनियल कार्मोन ने जनरल जैकब के साथ अपनी यादें ताजा करते हुए एक भावुक खुलासा किया। कार्मोन ने बताया कि एक बार पूछे जाने पर जनरल ने कहा था, मेरा जन्म भारत में हुआ, मैंने भारत के लिए लड़ाई लड़ी और मैं चाहता हूं कि मुझे भारत में ही दफनाया जाए। अपनी यहूदी जड़ों और भारतीय देशभक्ति के बीच उन्होंने कभी कोई अंतर महसूस नहीं किया, क्योंकि उन्हें भारत में वह सम्मान और अपनापन मिला जो दुनिया के अन्य हिस्सों में यहूदियों के लिए अक्सर दुर्लभ रहा है।

सेवा का लंबा सफर सेना से 1978 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी जैकब का सार्वजनिक जीवन थमा नहीं। उन्होंने पंजाब और गोवा के गवर्नर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। पंजाब के कठिन दौर में उन्होंने प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया। 13 जनवरी, 2016 को जब 94 साल की उम्र में उनका निधन हुआ, तो उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम संस्कार में न केवल भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी और मंत्री मौजूद थे, बल्कि बांग्लादेश के राजदूत ने भी वहां उपस्थित होकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी।

जनरल जैकब का जीवन यह साबित करता है कि भारत का अपनापन ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसने एक यहूदी को न केवल भारत का सपूत बनाया, बल्कि उसे दक्षिण एशिया के इतिहास में एक अमर नायक के रूप में दर्ज भी कर दिया।

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