AI का कहर: क्या अगले 10 सालों में तीन गुना बढ़ेगी बेरोजगारी? नोबेल विजेता ने दी बड़ी चेतावनी
News Image

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल चैटबॉट या फोटो बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। आज संगीत रचना, कोडिंग, कानूनी दस्तावेजों का ड्राफ्ट तैयार करना और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे हर क्षेत्र में AI का बोलबाला है। मानव जीवन का शायद ही कोई हिस्सा हो जो इससे अछूता हो। लेकिन तकनीक की यह चमक अब नौकरियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

तेज रफ्तार, बड़ी चिंता 2024 के अर्थशास्त्र नोबेल विजेता और MIT के प्रोफेसर डारोन ऐसमोग्लू ने AI को लेकर गंभीर आगाह किया है। उनका मानना है कि यदि AI के विकास की मौजूदा दिशा नहीं बदली, तो अगले एक दशक में बेरोजगारी तीन गुना तक बढ़ सकती है। ऐसमोग्लू के अनुसार, औद्योगिक क्रांति को व्यापक असर दिखाने में 80 साल लगे थे, जबकि AI ने महज 1-2 वर्षों में हर उद्योग को अपनी चपेट में ले लिया है।

सफेदपोश नौकरियों पर संकट इस बार खतरा केवल शारीरिक श्रम वाली नौकरियों तक सीमित नहीं है। पहली बार क्रिएटिविटी और क्रिटिकल थिंकिंग से जुड़ी व्हाइट कॉलर जॉब्स पर भी तलवार लटकी है। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में युवाओं की हायरिंग पर पहले ही असर दिखने लगा है। मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक करोड़ों लोगों को अपना पेशा बदलने की मजबूरी हो सकती है।

क्या नई नौकरियां पर्याप्त होंगी? AI के समर्थकों का तर्क है कि यह तकनीक नई रोजगार पैदा करेगी, जैसे AI ट्रेनिंग। हालांकि, ऐसमोग्लू इसे नाकाफी मानते हैं। उनका कहना है कि AI जिस रफ्तार से पुरानी नौकरियां खत्म कर रहा है, नई नौकरियां उसकी तुलना में बहुत कम हैं। कई फ्रीलांसिंग प्रोजेक्ट्स में अच्छी कमाई के अवसर जरूर हैं, लेकिन वे अस्थाई और सीमित संख्या में हैं।

इंसानी जज्बे का क्या होगा? कुछ विशेषज्ञ अभी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं। म्यूजिक प्रोड्यूसर और कानूनी पेशेवरों का मानना है कि AI रिसर्च में मदद कर सकता है, लेकिन इंसानी अनुभव, भरोसे और निर्णय लेने की क्षमता की जगह नहीं ले सकता। उनके अनुसार, क्रिएटिविटी में इंसानी संस्पर्श अनिवार्य है।

समाधान क्या है? ऐसमोग्लू AI पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं हैं। उनका सुझाव है कि कंपनियों को ऐसा AI विकसित करना चाहिए जो इंसानों को रिप्लेस करने के बजाय उनकी उत्पादकता (Productivity) बढ़ाए। उन्होंने सरकारों को भी सलाह दी है कि वे टैक्स नियमों में बदलाव करें ताकि कंपनियां केवल ऑटोमेशन के बजाय इंसानों को काम पर रखने के लिए प्रोत्साहित हों।

निष्कर्ष यह है कि AI का आगमन टाला नहीं जा सकता, लेकिन हम इसे कैसे ढालते हैं, यही तय करेगा कि भविष्य में मानव श्रम का महत्व बना रहेगा या मशीनों का एकाधिकार होगा।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

सिलचर में NDA का विजय रथ : नगर निगम चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ

Story 1

न्यूजीलैंड दौरे से पहले टीम इंडिया की बढ़ी मुश्किलें, स्टार गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा बाहर

Story 1

स्विट्जरलैंड को भारत का चीज़ जवाब: पीएम मोदी ने स्विस राष्ट्रपति को भेंट किए ये खास पुरस्कार विजेता उपहार

Story 1

चुनाव आयोग का बड़ा खुलासा: राहुल गांधी के साथ 240 सांसदों की मुलाकात क्यों टल गई?

Story 1

दिल्ली में सियासी घमासान: CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया ब्लॉक का मार्च, राहुल-प्रियंका हिरासत में

Story 1

ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम: धमकी देने वाले बड़ी मुसीबत में हैं, चुकानी होगी भारी कीमत

Story 1

आई लव यू बेबी... क्या अविनाश मिश्रा ने ईशा सिंह संग कर लिया प्यार का इजहार?

Story 1

कॉकरोच जनता पार्टी पर सरकारी दबाव का आरोप, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले नेताओं की गिरफ्तारी की आशंका

Story 1

ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो : राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर अनोखा तंज, विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन

Story 1

धरने पर राहुल गांधी का तीखा प्रहार: मुझे हटाना है तो हटा दो, पर लोकतंत्र का जवाब दो