नई दिल्ली: चुनाव आयोग (ECI) ने मंगलवार शाम एक प्रेस नोट जारी कर उन अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें विपक्ष द्वारा आयोग से मुलाकात न हो पाने का आरोप लगाया गया था। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी घटना के पीछे प्रक्रियागत मतभेद मुख्य कारण थे।
शाम 4 बजे तक कोई आधिकारिक अनुरोध नहीं आयोग ने स्पष्ट किया कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल या सांसद की ओर से उनसे मिलने का कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ था। मीडिया रिपोर्टों के जरिए ही आयोग को इस प्रस्तावित मुलाकात की भनक लगी।
संसद भवन एनेक्सी में बैठक का प्रस्ताव था असामान्य बाद में दिल्ली पुलिस के माध्यम से सूचना मिली कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 240 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलना चाहता है। विपक्ष ने बैठक का स्थान संसद भवन एनेक्सी प्रस्तावित किया था। आयोग ने इसे स्थापित मानदंडों के विपरीत और असामान्य मानते हुए अस्वीकार कर दिया।
क्या है आयोग की तय प्रक्रिया? चुनाव आयोग के अनुसार, वर्ष 2025 में निर्धारित नियमों के तहत किसी भी राजनीतिक दल के अधिकृत प्रतिनिधियों को लिखित में समय मांगना होता है। इसके बाद आपसी सहमति से आयोग के आधिकारिक परिसर में ही बैठक आयोजित की जाती है। आयोग का कहना है कि वे इसी परंपरा का पालन करते हैं।
विपक्ष ने ठुकराया आयोग का लचीला रुख स्थिति को संभालने के लिए चुनाव आयोग ने एक बीच का रास्ता निकाला था। आयोग ने प्रस्ताव दिया कि उनका सबसे वरिष्ठ अधिकारी स्वयं बैठक स्थल पर जाकर विपक्ष का ज्ञापन स्वीकार कर लेगा। हालांकि, विपक्ष ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसके कारण गतिरोध बना रहा।
लोकतांत्रिक प्रोटोकॉल का सम्मान आयोग ने अपने बयान में दोहराया है कि वह संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पूरा सम्मान करता है। आयोग ने कहा है कि कोई भी राजनीतिक दल निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के दायरे में रहकर कभी भी मुलाकात कर सकता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है जिसका सभी दलों को पालन करना चाहिए।
Earlier today, it came to the Election Commission s attention through media reports that certain political parties—specifically, some Members of Parliament (MPs) along with their delegations—wished to meet the Commission. The Commission wishes to clarify that, as of 4:00 PM… pic.twitter.com/9twJ2KfICP
— ANI (@ANI) October 6, 2026
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